इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने शुक्रवार को कहा कि वह ब्रेंडन मैकुलम के बिना खुद को इंग्लैंड का टेस्ट कप्तान नहीं देख सकते। ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज हारने के बावजूद स्टोक्स ने साफ किया कि वह और मैकुलम ही टीम को आगे ले जाने के लिए सही लोग हैं। इंग्लैंड को एशेज सीरीज के पहले तीन टेस्ट में ही हार का सामना करना पड़ा, जिससे ऑस्ट्रेलिया में एशेज जीतने का इंतजार और लंबा हो गया। हालांकि, बॉक्सिंग डे टेस्ट में मिली जीत ने कुछ राहत जरूर दी। यह जनवरी 2011 के बाद ऑस्ट्रेलिया में इंग्लैंड की पहली टेस्ट जीत थी, लेकिन पूरी सीरीज को स्टोक्स ने निराशाजनक माना।
स्टोक्स ने किया मैकुलम का समर्थन
स्टोक्स और मैकुलम दोनों का करार 2027 तक है और दोनों ने मौजूदा दौरे के बाद भी अपने-अपने पदों पर बने रहने की इच्छा जताई है। स्टोक्स ने कहा, 'मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि मैं और ब्रेंडन आने वाले समय में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए सही लोग हैं। मैंने ब्रेंडन के साथ काम करने का पूरा आनंद लिया है। मुझे नहीं लगता कि कोई और व्यक्ति है, जिसके साथ मैं इस टीम को मौजूदा स्थिति से और ऊंचाइयों तक ले जा सकूं।' हालांकि, स्टोक्स ने माना कि इंग्लिश समर से पहले आत्ममंथन जरूरी होगा। उन्होंने आगे कहा, 'कप्तान और कोच के तौर पर हमें बैठकर यह सोचना होगा कि अगले स्तर पर पहुंचने के लिए हमें क्या बेहतर करना है।'
ऑस्ट्रेलिया में एशेज हार के बाद इंग्लैंड में अक्सर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। खुद स्टोक्स और मैकुलम की नियुक्ति भी चार साल पहले 4-0 की हार के बाद हुई थी। इस पर स्टोक्स ने कहा, 'हम 2010-11 के बाद से यहां नहीं जीत पाए हैं। हर बार हार के बाद बदलाव किए गए, लेकिन क्या उससे सच में कुछ बदला? अगर हम फिर वही करेंगे जो चार साल पहले किया था, तो हम दोबारा उसी स्थिति में पहुंच जाएंगे।'
'हम-दोनों पूरी कोशिश कर रहे हैं'
मैकुलम पिछले साल इंग्लैंड की व्हाइट-बॉल टीमों के कोच भी बने थे, अगले महीने भारत और श्रीलंका में होने वाले टी20 विश्व कप में टीम के कोच रहेंगे। ऐसे में उनके लंबे भविष्य को लेकर फैसला टूर्नामेंट के बाद ही होने की संभावना है। स्टोक्स ने कहा, 'यह स्थिति अभी साफ नहीं है, लेकिन हम दोनों अपना काम जारी रखने को लेकर काफी इच्छुक हैं।' स्टोक्स-मैकुलम की जोड़ी ने शानदार शुरुआत की थी और पहले 11 में से 10 टेस्ट जीते थे, लेकिन बाद में नतीजे संतुलित हो गए। पिछले 34 टेस्ट मैचों में इंग्लैंड ने 16 जीते, 16 हारे और दो ड्रॉ रहे। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया और भारत के खिलाफ पांच टेस्ट की बड़ी सीरीज में इंग्लैंड एक भी सीरीज नहीं जीत सका।