मोहम्मद शमी के वार्षिक अनुबंध को लेकर बीसीसीआई बुरी तरह धर्मसंकट में फंस गई है। सीओए से लेकर बोर्ड अधिकारियों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि इस मामले को लेकर अंतिम फैसले पर किस तरह पहुंचा जाए। बोर्ड ने पहले दो से तीन दिनों तक इस पर फैसले को टालने का निर्णय लिया था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि एक सप्ताह या इससे ज्यादा समय भी लग सकता है।
इस बीच बोर्ड में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि अपने स्तर पर किसी को जिम्मेदारी सौंपते हुए दोनों पक्षों से बात कर रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके आधार पर ही शमी के वार्षिक अनुबंध पर निर्णय लिया जाए, लेकिन इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर सीओए चेयरमैन विनोद राय को लगानी है।
फिलहाल कुछ दिनों के लिए बोर्ड ने घटनाक्रम पर नजर रखने का मन बनाया है। इस बीच मामले में अगर पुलिस शामिल हो जाती है तो बोर्ड के लिए तो फैसला लेने में आसानी होगी, लेकिन
शमी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।