बीसीसीआई व उसके द्वारा आयोजित की जाने वाली क्रिकेट प्रतियोगिताओं एवं आईपीएल को केंद्रीय खेल मंत्रालय के अधीन किए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, बीसीसीआई व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डी. मुरूगेसन व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि क्यों न याचिका विचारार्थ स्वीकारकर ली जाए। अदालत ने मामले पर सुनवाई 14 अगस्त तय की है।
अदालत ने यह नोटिस एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमिनीटेरियन अफेयर्स संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए।
याची ने अदालत से आग्रह किया है कि बीसीसीआई को खेल मंत्रालय के अधीन करते हुए इसे नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन घोषित कर देना चाहिए, जिससे आईपीएल जैसे खेल पर भी मंत्रालय का नियंत्रण हो सके।
याची ने कहा कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले ने बीसीसीआई के प्रबंधन पर विश्वास खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में माफिया पैसा लगा रहे हैं।
क्रिकेट के माध्यम से माफिया द्वारा कमाया गया यह पैसा आतंकी गतिविधियों में प्रयोग किया जा रहा है। वर्ष 2003 में दाऊद व उसके साथी इकबाल कासकर के नाम भी मैच फिक्सिंग में सामने आ चुके हैं।
इतना ही नहीं इस तरह के मामलों को रोकने के लिए एक न्यायिक कमेटी भी गठित की जाए ताकि इस दिशा में कठोर कानून बनाया जा सके।