इस मामले पर न्यायामूर्ति एके मेनन की सिंगल जज बेंच के सामने कंपनियों की ओर से 20 जुलाई तक संपत्ति के ब्योरा देने की बात कही गई है। बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली के मुताबिक, इन कंपनियों पर उनके 36 करोड़ रुपये बाकी हैं। जिसमें 14.50 करोड़ उनका मूल धन है बाकी भुगतान नहीं करने पर बढ़ा हुआ ब्याज है।
पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अंतरिम राहत के रूप में यह भी मांग की कि दोनों कंपनियों की ओर से अपनी संपत्ति से जुड़े किसी भी तरह के लेनदेन पर रोक लगाई जाए। उन्होंने दायर अर्जी में चिंता जाहिर करते हुए कहा, इन कंपनियों के निदेशकों ने अपने खातों से पैसों को दूसरी फर्म में डालकर छुपा दिया है। उधर परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट और परसेप्ट डी मार्क इंडिया लिमिटेड के वकील शार्दुल सिंह का कहना है कि वे 20 जुलाई तक संपत्ति से जुड़ी जानकारी का ब्योरा देंगे।
हाई कोर्ट के एक आदेश के अनुसार प्लेयर रिप्रजेंटेशन एग्रीमेंट के तहत दोनों कंपनियों को गांगुली का एक्सक्लूसिव मैनेजर बनने का अधिकार मिला था। इसमें मध्यस्थता का नियम भी लागू था। जब दोनों पक्षों में विवाद हुआ तो दोनों के बीच का एग्रीमेंट रद्द हो गया. इस पर सौरव गांगुली ने समझौते के तहत मध्यस्थता का नियम लगा दिया। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी।