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विदा लेंगे घरेलू क्रिकेट को बदलने वाले युगपुरुष: 299 मैचों में रेफरी रहे सुनील चतुर्वेदी होंगे सेवानिवृत्त

Fri, 12 Mar 2021 09:34 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुनील चतुर्वेदी - फोटो : ट्विटर @BCCI
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देश के मैच रेफरियों की जब भी बात होगी तो उनमें कानपुर के सुनील चतुर्वेदी का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। 1999 में बीसीसीआई के मैच रेफरियों के पहले बैच में सुनील भी थे। तब से अब तक रणजी, दलीप, ईरानी ट्रॉफी और आईपीएल में बतौर मैच रेफरी चलता आ रहा उनका यह सफर 23 साल बाद अब थमने जा रहा है। सुनील जुलाई में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई-सौराष्ट्र का क्वार्टर फाइनल उनका बतौर मैच रेफरी 299वां मैच था। घरेलू क्रिकेट को पटरी पर लाने में सुनील का योगदान कितना बड़ा है यह इसी से पता लगता है कि विजय हजारे में मुंबई और दिल्ली की टीमों ने उनके सम्मान में पंक्तियां लिखते हुए ग्रुप फोटो खिंचाया। शिखर धवन ने लिखा भारतीय क्रिकेट को इतनी लंबी सेवाएं देने के लिए धन्यवाद।

यूपी के लिए 72 प्रथम श्रेणी 16 लिस्ट ए मैच खेलने वाले सुनील ने नवंबर 1999 में ऊना में सेना-हिमाचल प्रदेश के बीच रणजी मैच से मैच रेफरी का सफर शुरू किया। सुनील कहते हैं कि उस दौरान घरेलू मैचों में कई वरिष्ठ क्रिकेटर अंपायरों का सम्मान नहीं करते थे। अनुशासन की कमी थी। मैच रेफरी आने के बाद कड़े फैसले लिए गए।
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जब अस्पताल से तिवारी क्षेत्ररक्षण के लिए लौटे
मैच रेफरी सुनील ने कुछ ऐसे बड़े फैसले लिए जो मील के पत्थर बन गए। 2014 में गोवा और झारखंड रणजी मुकाबले में सौरभ तिवारी शतक मारने के बाद कुछ ओवर फील्डिंग कर मैदान से बाहर चले गए। पता लगा सौरभ ने चोटिल होने की बात कही है। उन्होंने अंपायर को निर्देश दिए मैदान पर मौजूद डॉक्टर को भिजवाएं। दिन का खेल खत्म होने पर उन्होंने सौरभ से कहा कि अस्पताल में डॉक्टर को दिखाना होगा। सौरभ अस्पताल गए, लेकिन रात में लौट आए और सुबह मैदान पर क्षेत्ररक्षण कर रहे थे।

इरफान की मैच फीस काटी
इसी तरह आईपीएल में उन्होंने शेन वाटसन को अंग्रेजी में गाली देने पर चेतावनी दी। रेलवे के खिलाफ बड़ौदा के इरफान पठान की अपील पर संजय बांगड़ को आउट नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने क्रीज से दो कदम आगे निकल कर बीमर मारा जो बांगड़ की कमर पर पड़ा। सुनील ने पठान की सौ फीसदी मैच फीस काटी थी। सुनील का कहना है कि यह फैसले अनुशासन के लिए लेने पड़े।

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