देश की सबसे धनी खेल संस्था बीसीसीआई को एक और झटका लगा है।
ताजा झटका नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) की उपसमिति को उस समय लगा जब उन्हें पता चला कि बोर्ड को फर्जी जमीन करार से 50 करोड़ का चूना लग चुका है। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बोर्ड आपराधिक केस दर्ज करने पर विचार कर रहा है। मामला 2010 का है।
खबर सार्वजनिक होने के बाद बोर्ड के अंदर ऐसी स्थिति बन गई कि एनसीए की उपसमिति में खाली पड़ी सपोर्ट स्टाफ के पद के लिए चर्चा भी नहीं की जा सकी।
एनसीए की उपसमिति को बृहस्पतिवार को पता चला कि गुरुदत्त शानबाघ, जो न तो कभी बीसीसीआई के कर्मचारी रहे और न ही उनका कभी किसी राज्य संघों से कभी कोई नाता रहा, ने बोर्ड की तरफ से कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के साथ कुरकी एयरपोर्ट के नजदीक 49 एकड़ जमीन का सौदा किया है।
बीसीसीआई ने इस सौदे के लिए 46.135 करोड़ का भुगतान किया। बिदादी स्थित इस जमीन में बोर्ड की योजना एनसीए के लिए बिल्डिंग बनाने की थी लेकिन एयरपोर्ट से दूरी अधिक होने के कारण बोर्ड ने बाद में इसे रद्द कर दिया।
सौदे के लिए बीसीसीआई 50 करोड़ दे चुका था लेकिन बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों को जब पता चला कि इस जमीन को लेकर कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हैं तो वह भौंचक्के रह गए।
हाईकोर्ट ने 20 जून को इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जमीन की पूरी डील को अवैध करार दिया।
बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों को अब जाकर एहसास हुआ है कि वह ठगी का शिकार हो गए हैं। मामले में पूर्व मैनेजर (प्रशासनिक) एके झा की भूमिका संदेह के घेरे में है।