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पृथ्वी शॉ के बैन मामले में BCCI के दावे पर उठे सवाल, ढिलाई बरतने का लग रहा आरोप

Fri, 02 Aug 2019 07:57 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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पृथ्वी शॉ - फोटो : Social media
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बीसीसीआई का दावा है कि उन्हें पृथ्वी शॉ की डोप टेस्ट रिपोर्ट दो मई को मिली, जिसके चलते प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन हकीकत यह है कि अगर बोर्ड को रिपोर्ट मई में भी मिल गई थी तो शॉ को आईपीएल के बाकी बचे मैचों और मुंबई प्रीमियर लीग में कैसे खेलने की अनुमति दी गई। साथ ही इस क्रिकेटर को नेशनल क्रिकेट अकादमी की सुविधाएं भी उठाने की छूट दी गई।

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बोर्ड की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के लिए एनडीटीएल से 10 दिन के अंदर डोप टेस्ट रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन एथलीट गोमती की तरह लैब ने इस रिपोर्ट में भी देरी कर दी। हालांकि रिपोर्ट दो मई को मिलने के बावजूद बोर्ड इस मामले में तुरंत कार्रवाई कर सकता था। बोर्ड ने इस मामले पर कार्रवाई की प्रक्रिया 12 मई को आईपीएल बीत जाने के बाद शुरू की। फिर जो प्रावीजनल प्रतिबंध उसने शॉ पर 16 जुलाई को लगाया वह इस दौरान भी लगाया जा सकता था। ऐसे में शॉ आईपीएल, एमपीएल नहीं खेल पाते। यही नहीं शॉ इस दौरान एनसीए की सुविधाओं का भी लाभ उठाते रहे।
 

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पैनल पर उठे सवाल

पृथ्वी शॉ - फोटो : Social media
वाडा नियमों के मुताबिक हियरिंग पैनल में एक खिलाड़ी, एक लीग कानून विशेषज्ञ और एक डॉक्टर का होना जरूरी है। किसी भी खिलाड़ी पर फैसला सुनाए जाने के आर्डर में इन तीनों विशेषज्ञों के हस्ताक्षर होते हैं। जब तक तीनों आर्डर पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं तब तक इसे जारी नहीं किया जाता है, लेकिन शॉ के आर्डर में सिर्फ डॉ. अभिषेक सॉल्वी के हस्ताक्षर हैं। इसका मतलब यह हुआ कि एक सदस्यीय पैनल ने इस मामले की सुनवाई की, जो की वाडा नियमों के खिलाफ है।
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