आर्थिक मंदी की मार भारतीय क्रिकेटरों पर भी जल्द पड़ सकती है। ऐसी संभावना है कि बीसीसीआई अपने नए करार में कई खिलाड़ियों की छुट्टी कर देगी।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड हर साल अपने बेहतरीन क्रिकेटरों के साथ वार्षिक अनुबंध कराता है। बोर्ड ने पिछले साल 30 सितंबर 2012 से 31 अक्टूबर 2013 तक 43 क्रिकेटरों के साथ अनुबंध किया था।
बीसीसीआई ने अपने राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ केंद्रीय करार के लिए तीन ग्रेड (ए, बी और सी) बना रखा है और इस ग्रेड में शामिल क्रिकेटरों को उनके ग्रेड के आधार पर क्रमशः एक करोड़, 50 लाख और 25 लाख रुपये वार्षिक रूप से देता है।
लेकिन अब ऐसी संभावना है कि बीसीसीआई अपने नए करार की प्रक्रिया में बदलाव ला सकती है और सी ग्रेड को भी खत्म कर सकती है। बोर्ड के कुछ शीर्ष अधिकारी वार्षिक करार में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं।
खिलाड़ियों के नए करार के बारे में बीसीसीआई 29 सितंबर को अपने वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में फैसला करेगी।
हालांकि कहा जा रहा है ग्रेड ए के खिलाड़ियों को अब नए करार के साथ डेढ़ करोड़ रुपए वार्षिक मिल सकता है। इससे पहले ग्रेड ए के खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपए मिलते थे।
स्वनिर्वासित अध्यक्ष श्रीनिवासन जब बीसीसीआई के सचिव थे तो उस समय ग्रेड डी (15 लाख रुपए वार्षिक) को खत्म कर दिया गया था।
ग्रेड डी के बाद अब सी को भी खत्म किए जाने के संबंध में बोर्ड से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि खिलाड़ी अब वार्षिक करार से ज्यादा आईपीएल में खेलकर कमा ले रहे हैं।
आईपीएल से पहले, करार की राशि उभरते खिलाड़ियों के लिए एक तरह से सम्मान जैसा था। लेकिन आईपीएल के आ जाने से परिस्थितियां बदल गई हैं।
ग्रेड सी में अभी शिखर धवन और चेतेश्वर पुजारा समेत 20 खिलाड़ी शामिल हैं। जबकि ग्रेड ए में सचिन तेंदुलकर और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत नौ शीर्ष क्रिकेटर हैं। ग्रेड बी में हरभजन सिंह और इशांत शर्मा समेत आठ खिलाड़ी शामिल हैं।