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Fake Fielding: विराट पर लगे 'फेक फील्डिंग' के आरोप, जानें क्या है इसकी वजह, इस पर क्या हैं आईसीसी के नियम?

Thu, 03 Nov 2022 08:38 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, एडिलेड

सार

बांग्लादेश के नुरुल हसन का कहना है कि विराट कोहली ने टी20 विश्व कप मैच के दौरान फेक फील्डिंग की थी। हालांकि, अंपायरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और भारत या कोहली के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। 
 
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विराट कोहली के वायरल विडियो का स्क्रीनग्रैब - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टी20 विश्व कप में भारतीय टीम तीन मैच जीत चुकी है। इसके साथ ही भारत के लिए सेमीफाइनल की राह बेहद आसान हो गई है। अब टीम इंडिया को अपने आखिरी लीग मैच में जिम्बाब्वे को हराना है और सीधे सेमीफाइनल में जगह बनानी है। यह मैच हारने पर भी भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंच सकती है, लेकिन इस स्थिति में भारत को दुआ करनी होगी कि दक्षिण अफ्रीका अपना आखिरी मैच हार जाए या बांग्लादेश की टीम पाकिस्तान को करीबी अंतर से हरा दे। 
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भारत ने अपने चौथे मैच में बांग्लादेश को डकवर्थ लुईस नियम के तहत पांच रन से हराया। इस मुकाबले में बांग्लादेश की टीम एक समय पर मजबूत स्थिति में थी, लेकिन बारिश के बाद मैच पलट गया और भारत ने यह रोमांचक मुकाबला पांच रन से जीत लिया। इस मैच के बाद बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज नुरुल हसन ने भारत पर बेईमानी के आरोप लगाते हुए कहा कि मैच के दौरान विराट कोहली ने फेक फील्डिंग की थी, लेकिन अंपायरों ने उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। 

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क्या है मामला?
बांग्लादेश की पारी के सातवें ओवर में अक्षर पटेल की गेंद पर लिटन दास ने डीप पॉइंट पर शॉट खेला। अर्शदीप सिंह ने गेंद पकड़ी और थ्रो किया। इस बीच बल्लेबाज दूसरे रन के लिए भाग चुके थे। विराट पॉइंट पर फील्डिंग कर रहे थे। जब गेंद उनके पास से गई तो उन्होंने नॉन स्ट्राइकर की तरफ थ्रो करने की एक्टिंग की। हालांकि, गेंद उनके पास थी ही नहीं। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा हुआ है। 

क्या है फेक फील्डिंग?
जब कोई फील्डर जानबूझकर बल्लेबाजों का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है और उनके रन भागने या गेंद को खेलने में परेशानी खड़ी करता है तो इसे फेक फील्डिंग कहा जाता है। आईसीसी ने नियम 41.5 में इसका जिक्र है। फेक फील्डिंग करने पर बल्लेबाजी करने वाली टीम को पांच रन दे दिए जाते हैं। साथ ही जिस गेंद पर फेक फील्डिंग हुई है, उसमें बने रन भी बल्लेबाजी टीम को मिलते हैं। इसके साथ ही उस गेंद को डेड घोषित कर दिया जाता है। बल्लेबाजों को यह तय करने की छूट भी मिलती है कि अगली गेंद का सामना कौन करेगा। 

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क्या हैं आईसीसी के नियम?
आईसीसी के नियम के अनुसार मैदान में खड़े अंपायरों को यह करना होता है कि किसी फील्डर ने फेक फील्डिंग की है या नहीं। अगर अंपायर किसी खिलाड़ी को फेक फील्डिंग का दोषी पाते हैं तो वह उस गेंद को डेड घोषित कर देते हैं और दूसरे अंपायर को इस बारे में जानकारी देते हैं। 

आईसीसी ने फेक फील्डिंग का नियम साल 2017 में लाया था। ऑस्ट्रेलिया के मार्नस लाबुशेन पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें फेक फील्डिंग का दोषी पाया गया था। उन्होंने घरेलू मैच में एक गेंद पकड़ने के लिए डाइव लगाई, लेकिन गेंद उनसे रुकी नहीं। इसके बावजूद उन्होंने थ्रो करने का इशारा किया और उनकी टीम पर पेनल्टी लग गई थी।
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