6 दिसंबर से एडिलेड में शुरू होने वाले पहले टेस्ट पर पूरी दुनिया की नजरें होंगी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत साल की आखिरी टेस्ट सीरीज खेलने के लिए पूरी तैयार है। विराट कोहली के पास अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को सीरीज दिलाने का सुनहरा अवसर है।
विशेषज्ञों की माने तो स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की गैरमौजूदगी में 1970 के दशक के अंतिम वर्षों के बाद यह सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है। उस समय कैरी पैकर वर्ल्ड सीरीज में खेलने के लिए कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय टीम से दूर हो गए थे। उस समय 1977-78 में बिशन सिंह बेदी की टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छी शुरुआत की थी लेकिन आखिर में उसे सीरीज में 2-3 से हार का सामना करना पड़ा था।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान किम ह्यूज जो उस टेस्ट सीरीज का हिस्सा थे कहते हैं कि, 'मुझे नहीं लगता कि हमें अलग वक्त की दो टीमों की तुलना करनी चाहिए। उस समय खेल की परिस्थितियां और खिलाड़ी अलग थे। स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर के बिना यह सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है। भारत के पास ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीतने का बहुत अच्छा मौका है।'
ह्यूज ने कहा कि दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाला यह सबसे मजबूत भारतीय बल्लेबाजी क्रम में से है। सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में पहले खेल चुके हैं और परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
64 वर्षीय इस पूर्व खिलाड़ी ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 70 टेस्ट और 97 एकदिवसीय मैच खेले। उन्होंने कहा, 'कोहली टेस्ट सीरीज के लिए पिछली बार यहां 2014 में आए थे। उन्होंने काफी रन बनाए थे। इस बार भी वह शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। आपको जल्दी आउट करना होगा। एक बार उनकी आंखें जम जाएं तो फिर वह आप पर भारी पड़ जाएंगे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को मूल पर टिके रहना होगा और ऑफ स्टंप पर गेंदबाजी करनी होगी।'