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Virat Kohli: 'कोहली ऑस्ट्रेलियाई तेवरों वाले गैर कंगारू खिलाड़ी', इस पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने विराट को सराहा

Mon, 12 May 2025 07:35 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय टीम के कोच रह चुके चैपल ने अपने कॉलम में लिखा कि कोहली का टेस्ट करियर 2011 में शुरू हुआ और उनका एक दशक से अधिक लंबा करियर संयम, जोश और निडरता से भरा हुआ था।
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विराट कोहली - फोटो : ANI
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विस्तार
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विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चारों ओर उनकी सराहना की जा रही है। भारत और अन्य देशों के पूर्व खिलाड़ियों ने किंग कोहली के करियर को सराहा है। इसी कड़ी में अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज ग्रेग चैपल का नाम भी जुड़ गया है। चैपल ने कहा कि कोहली ऑस्ट्रेलियाई तेवरों वाले गैर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि इस बल्लेबाज के संन्यास लेने से एक युग का अंत हो गया है। 
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इंग्लैंड दौरे से पहले लिया फैसला 
कोहली ने सोमवार को इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए अपने टेस्ट करियर पर विराम लगाने की जानकारी दी। कोहली ने ऐसे समय लाल गेंद के इस प्रारूप को अलविदा कहा जब भारतीय टीम अगले महीने होने वाले इंग्लैंड दौरे की तैयारी में जुटी थी। भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इस सीरीज में कोहली के अलावा रोहित शर्मा भी होंगे जिन्होंने हाल ही में टेस्ट से संन्यास लिया था। 

भारतीय टीम के कोच रह चुके चैपल ने ईएसपीएनक्रिकइंफो के लिए अपने कॉलम में लिखा कि कोहली का टेस्ट करियर 2011 में शुरू हुआ और उनका एक दशक से अधिक लंबा करियर संयम, जोश और निडरता से भरा हुआ था। चैपल ने लिखा, कोहली के संन्यास से सचिन तेंदुलकर के बाद भारतीय क्रिकेट में सबसे अधिक परिवर्तनकारी खिलाड़ी का अध्याय खत्म होता है और शायद कोहली भारत की क्रिकेट पहचान पर सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव के मामले में उनसे भी आगे निकल गए। एक दशक से भी अधिक समय तक कोहली ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए बल्कि उम्मीदों को फिर से परिभाषित किया, परंपराओं को चुनौती दी और 21वीं सदी के आत्मविश्वासी भारत का प्रतीक बने। 
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चैपल बोले- कोहली टेस्ट में एक योद्धा थे
चैपल ने लिखा,  हमने जो गैर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर देखे हैं, उनमें उनके तेवर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों की तरह हैं। वह टेस्ट में एक योद्धा थे, कभी भी एक इंच भी पीछे नहीं हटते थे। एक समय था जब भारतीय क्रिकेट विशेष तौर पर विदेशों में आसानी से घुटने टेक देता था लेकिन यह धीरे-धीरे बदल गया। सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को नई रीढ़ दी। धोनी की शानदार नेतृत्व क्षमता से सफेद गेंद के क्रिकेट में भारत ने दबदबा बनाया। लेकिन कोहली ने इसे ऊर्जा दी। उन्होंने नई पटकथा लिखी जिसमें भारत सिर्फ विदेशों में प्रतिस्पर्धी ही नहीं हुआ बल्कि उससे जीत की भी उम्मीद की जाती।
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