भारत के खिलाफ श्रंखला में अब तक चारों खाने चित होती आई ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी इज्जत बचाने के लिए पुराने हथियार छींटाकशी (स्लेजिंग) को हथियार बना लिया। फिरोजशाह कोटला पर शनिवार को नए कप्तान शेन वाटसन की अगुवाई में कंगारुओं ने मुंह से जमकर आग उगली।
भारतीय पारी के दौरान कप्तान वाटसन समेत, डेविड वार्नर, जेम्स पैटिंसन, पीटर सिडल, मिचेल जानसन अपशब्दों के साथ अपनी सीमाएं लांघ गए। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की मौजूदगी में रवींद्र जडेजा और डेविड वार्नर के बीच झगड़ा इस कदर बढ़ा कि अंपायरों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
ऑस्ट्रेलियाई कप्तानों में चाहें इयन चैपल हों या स्टीव वॉ या फिर रिकी पोंटिंग इनका प्रमुख हथियार छींटाकशी रहा है। लेकिन माइकल क्लार्क के कप्तान बनने के बाद इसमें बदलाव आया। क्लार्क जैसे ही कप्तानी से बाहर हुए वॉटसन की टीम पुरानी हरकतों पर उतर आई।
उखड़ी पिच पर मुरली विजय और पुजारा ने जिस तरह खूंटा गाड़ा उससे कंगारू आपे से बाहर हो गए। सिडल की एक गेंद उछलकर पुजारा के ग्लव्स पर लगी। वह वहीं बैठ गए। वाटसन ने सहनुभूति जताने की बजाय उनके पास जाकर तलाईं बजाकर ताने मारे।
पैटिंसन व जानसन ने मुंह से लगातार पुजारा को निशाना बनाया। अंत में पुजारा नियंत्रण खोकर विकेट गंवा बैठे। अजिंक्य रहाणे को सिडल की उछलती गेंद हेलमेट पर लगी। उन्होंने खाता भी नहीं खोला था। सिडल ने पिच के बीच में ही रहाणे को खरी खोटी सुनाई। इसके बाद एक रन लेने के दौरान सिडल बीचो बीच में खड़े हो गए। रहाणे का कंधा उनक कंधे से टकराया। बाद में उन्होंने रहाणे को आक्रामक शब्दों में लताड़ा। अगले ही ओवर में उन्होंने अपना विकेट गंवा दिया।
जडेजा ने शाम को पानी के लिए 12वां खिलाड़ी बुलाया। मिड ऑन पर खड़े वार्नर ने अनाप-शनाप बकना शुरू कर दिया। जडेजा ने भी जवाब में बैट के हैंडल से इशारा किया। वार्नर बुरी तरह भड़क गए। वह जडेजा की ओर दौड़े। अंपायर ने उन्हें समझाया। अंपायरों ने वाटसन को बुलाया। धोनी ने भी वाटसन से बात की। बावजूद इसके वार्नर के उकसाने का क्रम जारी रहा।
रणनीति के तहत बनाया हथियार
मैच के बाद ऑफ स्पिनर नॉथन लियोन ने खुलासा किया कि इस श्रंखला में अब तक ऑस्ट्रेलिया ने छींटाकशी नहीं की। लेकिन इस टेस्ट में इसे रणनीति के रूप में अपनाया गया। ऑस्ट्रेलियाई इसी तरह की क्रिकेट खेलते हैं। वहीं मुरली विजय ने कहा कि यह खेल का हिस्सा है। उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना।