इस दौरान अटल जी ने खेल भावना दिखाते हुए न सिर्फ भारतीय टीम का हौसला बढ़ाया बल्कि उपहार स्वरूप एक बल्ला भी दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने शुभकामनाओं के तौर पर दिए बल्ले में लिखा था, 'खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए, शुभकामनाएं।
कड़ी सुरक्षा के बीच मार्च 2004 से अप्रैल 2004 तक पहले वनडे और फिर टेस्ट श्रंखला होनी थी। देश में इस सीरीज का काफी विरोध भी हुआ था। मगर सौरव गांगुली की अगुवाई में भारतीय टीम ने पहली बार पाकिस्तान को उसके घर पर जाकर पटखनी दी थी।
सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़, जहीर खान जैसे अनुभवी खिलाड़ी तो इरफान पठान, लक्ष्मीपति बालाजी, मोहम्मद कैफ जैसे युवा ब्रिगेड के दम पर भारतीय टीम ने वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम किया तो टेस्ट सीरीज 2-1 में 2-1 से फतह हासिल की। मुल्तान में हुए पहले टेस्ट में सहवाग ने तिहरा शतक (309 रन) जमाकर इतिहास रच दिया था।
पाकिस्तानी टीम में भी शोएब अख्तर, इंजमाम-उल-हक, शाहिद अफरीदी, मोहम्मद यूसुफ, यूनिस खान जैसे धाकड़ खिलाड़ी थे। अब भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध अच्छे नहीं चल रहे हो, लेकिन इसे सुधारने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की पहल सराहनीय थी, जो उनके खेल प्रेम को झलकाता था।