भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए। ठाकुर का मानना है कि सीओए की नियुक्ति से बीसीसीआई की साख और स्वशासन पर प्रभाव पड़ा है।
ठाकुर ने एएनआई से कहा, 'यह वो बीसीसीआई नहीं है, जो एक साल पहले होता था।' उन्होंने दावा करते हुए कहा, 'बोर्ड ने अपनी साख गंवाई है और इंटरनेशनल स्तर पर राजस्व में भी नुकसान झेला है।'
ठाकुर ने आगे कहा, 'मेरे ख्याल से समय आ गया है जब बैठकर यह पता किया जाए कि लोढा समिति की सिफारिशों से बीसीसीआई ने कुछ हासिल भी किया या सिर्फ नुकसान झेला है।'
ठाकुर ने बीसीसीआई में अपने समय को याद करते हुए कहा कि मेरी अध्यक्षता में बीसीसीआई ने लोढा समिति की करीब 90 प्रतिशत सिफारिशें स्वीकार की थी। मगर मेरे जाने के बाद कोई सिफारिश स्वीकार नहीं की गई।
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उन्होंने कहा, '1 अक्टूबर 2016 को हमने करीब 90 प्रतिशत सिफारिशें स्वीकार की, लेकिन पिछले 11 महीनों में एक भी सिफारिश स्वीकार नहीं की गयी। दुर्भाग्यवश पिछले 11 महीनों में मुझे और अजय शिर्के को हटाने के बावजूद कुछ नहीं बदला।'
बीसीसीआई और सीओए के बीच हितों राय के संघर्ष पर ठाकुर ने कहा, 'खेल प्रेमियों को यह बताना होगा कि बीसीसीआई को उसके चयनित अधिकारी चलाए या फिर सीओए। सीओए की भूमिका और अधिकार क्या है और इससे हमें क्या फायदा मिल रहा है? आपके पास दो पॉवर सेंटर नहीं हो सकते। बोर्ड में रहकर आपके दो अलग-अलग विचार नहीं हो सकते।'