ट्रांस-एथलीट अनाया बांगड़ ने कहा कि महिला क्रिकेट में वापसी की कोशिश के दौरान बीसीसीआई से उन्हें खामोशी मिली, जबकि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें खेलने का रास्ता दिया। अब अनाया क्लब क्रिकेट के जरिए खुद को साबित कर डब्ल्यूबीबीएल में जगह बनाने की तैयारी में हैं और आलोचकों से इस मुद्दे पर पहले शिक्षित होने की अपील की है।
ट्रांस-एथलीट अनाया बांगड़ ने कहा है कि क्रिकेट में अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ने की उनकी यात्रा बेहद मुश्किल और अकेली रही है। भारत में महिला क्रिकेट में खेलने के लिए मदद मांगने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, जबकि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें महिला क्रिकेट में खेलने का रास्ता उपलब्ध कराया है।
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25 वर्षीय अनाया ने पीटीआई से खास बातचीत में कहा कि ट्रांस एथलीट के तौर पर बदलाव की प्रक्रिया से गुजरना और मौजूदा राजनीतिक माहौल में खेल के लिए अपनी जगह बनाना बेहद अलगाव भरा अनुभव हो सकता है। उन्होंने कहा, 'जब आप ट्रांजिशन कर रहे होते हैं और ट्रांस-एथलीट होते हैं, तो इस राजनीतिक माहौल में यह काफी अलग-थलग करने वाला हो सकता है। आपको लगता है कि कोई ऐसा नहीं है जो वास्तव में आपको समझता हो।' अनाया के मुताबिक, इस पूरे दौर में अकेले रहना और खुद के साथ समय बिताना उनके लिए ताकत का जरिया बना।
बीसीसीआई से मदद मांगी, लेकिन मिली चुप्पी
अनाया ने बताया कि उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट में खेलने की संभावनाओं को लेकर बीसीसीआई से संपर्क किया था। हालांकि, उन्हें बोर्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए निराशाजनक और दिल तोड़ने वाला था। अनाया को उम्मीद है कि भविष्य में बीसीसीआई इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाएगा, खासकर इसलिए क्योंकि भारत में ट्रांस महिला क्रिकेटर के तौर पर उनका मामला एक शुरुआती उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि बीसीसीआई इस मुद्दे पर नीति तैयार करता है तो वह अपनी पूरी यात्रा और अनुभव के आधार पर अपनी राय साझा करने के लिए तैयार हैं।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने खोला रास्ता
बीसीसीआई से प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद अनाया को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से समर्थन मिला। उन्होंने जून में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की हेड ऑफ इंटीग्रिटी जैकी पार्ट्रिज से संपर्क किया था। ऑस्ट्रेलिया की नीति के तहत उन्हें महिला क्रिकेट में सामुदायिक स्तर की प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति मिली। इसके बाद अनाया ने कम्युनिटी शील्ड स्तर पर खेलने का रास्ता हासिल किया। अनाया ने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे उन्हें दोबारा अपनी पहचान के साथ क्रिकेट खेलने का मौका मिला है।
2022 में शुरू किया था ट्रांजिशन
अनाया ने वर्ष 2022 में अपना जेंडर ट्रांजिशन शुरू किया था। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्रिकेट से दूर होना पड़ा। इसी साल मार्च में उनकी जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी हुई। उन्होंने बताया कि ट्रांजिशन के दौरान उन्हें खेल छोड़ने, परिवार में बदलावों और व्यक्तिगत स्तर पर कई मुश्किलों से गुजरना पड़ा। अनाया ने कहा कि यह सफर रोलरकोस्टर की तरह रहा है, कभी बेहद कठिन, भावनाओं से भरा और कई बार क्रूर भी। हालांकि, उन्हें खुशी है कि अब वह फिर से क्रिकेट की ओर लौटने की स्थिति में हैं।
'मुझे लगा था कि अब कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी'
अनाया ने माना कि ट्रांजिशन शुरू करने के बाद उन्हें लगा था कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस खुद को सामने रखा और परिस्थितियों को मौका दिया। अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की मंजूरी मिलने के बाद उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग लाई है। उनके पिता संजय बांगड़ भारत के पूर्व क्रिकेटर और प्रतिष्ठित कोच हैं।
डब्ल्यूबीबीएल में खेलने पर नजर, पहले क्लब क्रिकेट में खुद को साबित करेंगी
अनाया की नजर अब महिला बिग बैश लीग पर है। वह अगले साल मार्च में डब्ल्यूबीबीएल में खेलने की उम्मीद कर रही हैं, हालांकि इसके लिए उन्हें निर्धारित टेस्टोस्टेरोन स्तर की शर्तों को पूरा करना होगा। फिलहाल उन्होंने किसी स्थानीय क्लब के साथ करार नहीं किया है। वह कुछ क्रिकेट क्लबों के संपर्क में हैं और सही टीम का इंतजार कर रही हैं।
अनाया ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य क्लब क्रिकेट खेलना और अपने प्रदर्शन के जरिए खुद को साबित करना है। इसके बाद अच्छे प्रदर्शन के आधार पर डब्ल्यूबीबीएल में चयन का मौका मिल सकता है। उन्होंने इसे बेबी स्टेप्स यानी छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया बताया।
'मैं लंबे समय से सर्वाइवल मोड में थी'
अनाया ने कहा कि वह लंबे समय से सर्वाइवल मोड में थीं और अब जाकर अपनी पूरी यात्रा को समझने और महसूस करने का समय मिल रहा है। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि फिलहाल यही है कि उन्हें दोबारा क्रिकेट खेलने के लिए एक जगह मिल गई है। उन्होंने कहा कि उनका सफर आसान नहीं रहा, लेकिन इसने उन्हें और मजबूत और समझदार बनाया है।
अनाया के मुताबिक, ट्रांजिशन का उनका फैसला खुद की पहचान के साथ खुश और सहज रहने के लिए था। इसके लिए उन्हें अपने पसंदीदा खेल से दूरी बनाने और जिंदगी में कई बड़े बदलावों से गुजरना पड़ा। अब वह दोबारा मैदान पर लौटने की तैयारी में हैं और उनका लक्ष्य अपने प्रदर्शन के दम पर महिला क्रिकेट में आगे बढ़ना है।