सुप्रीम कोर्ट का जुलाई, 2016 में दिया गया आदेश साफ तौर पर यह कहता है कि सारे क्रिकेट संघ के सारे अधिकारियों को तीन साल का एक कार्यकाल पूरा करने के बाद अपने पदों को तीन साल के अंतराल (कूलिंग ऑफ पीरियड) के लिए छोड़ देना चाहिए।
अमित शाह 2009 से क्रिकेट संघ के पदाधिकारी हैं (2009-2014, उपाध्यक्ष; 2014 से अब तक अध्यक्ष) जबकि उनके बेटे को 2013 में संयुक्त सचिवा बनाया गया था। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड और राज्य एसोसिएशनों के सभी अयोग्य पदाधिकारियों को अपना पद छोड़ देने का आदेश दिया था। इसके मद्देनजर कई इस्तीफे आए और कई प्रमुख राजनीतिज्ञों ने अपने पद छोड़े थे।
इस्तीफा देने वाले सांसदों में शरद पवार (मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन), राजीव शुक्ला (उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन), ज्योतिरादित्य सिंधिया (मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन) और रणजीब बिस्वाल (ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन) के नाम शामिल थे, लेकिन, अमित शाह अबतक इस पद पर बने हुए थे।
दिलचस्प यह था कि कि अमित शाह के बेटे जय शाह को 2013 में बिना किसी मुश्किल के संयुक्त सचिव के पद पर बैठा दिया गया, इसके लिए उनसे पहले संयुक्त सचिव अशोक साहेबा को इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया। इस आदेश को किसी ने चुनौती नहीं दी और जय शाह आसानी से एसोसिएशन में शामिल कर लिए कर गए।
जीसीए में शाह परिवार की राजनीतिक ताकत सेंट्रल बोर्ड ऑफ अहमदाबाद (सीबीसीए) के दो तिहाई वोटों पर उनके कब्जे की देन है। सीबीसीए राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के भीतर सबसे मजबूत है। हालांकि अमित शाह के कार्यकाल में ही दुनिया का बसे बड़ा और आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो रहा है। अहमदाबाद में सरदार पटेल स्टेडियम का पुनर्निर्माण कार्य अपने अंतिम चरणों में है।