भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने अपने करियर को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर खुलकर बात की है। मिश्रा उस दौर में भारतीय टीम में आए थे, जब महेंद्र सिंह धोनी का उदय हो रहा था। अमित भारत के लिए 22 टेस्ट, 36 वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, लेकिन कभी भी टीम की प्लेइंग इलेवन में स्थायी जगह नहीं बना पाए।
'धोनी न होते तो..'
धोनी पर अकसर अमित मिश्रा के करियर के जल्दी खत्म होने को लेकर आरोप लगे हैं। लेकिन स्पिन गेंदबाज ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मैन्सएक्सपी (MensXP) से बातचीत में मिश्रा ने कहा, 'लोग कहते हैं कि अगर धोनी नहीं होते तो मेरा करियर बेहतर होता। लेकिन कौन जानता है, अगर वो नहीं होते तो शायद मैं टीम में आता ही नहीं। मैं उनके ही नेतृत्व में टीम में आया और कई बार वापसी की। एक कप्तान के तौर पर उनकी सहमति रही होगी, तभी मैं बार-बार टीम में लौट पाया। इसे देखने का एक सकारात्मक नजरिया भी है।'
अमित मिश्रा ने साझा किया पुराना किस्सा
मिश्रा ने धोनी के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कप्तान के रूप में उन्होंने हमेशा उनका मार्गदर्शन किया। खास तौर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी आखिरी वनडे सीरीज का एक किस्सा उन्होंने साझा किया। उन्होंने कहा, 'जब भी मैं प्लेइंग इलेवन में होता था, ऐसा कभी नहीं हुआ कि धोनी मेरे पास न आए हों या मुझे कोई सलाह न दी हो। न्यूजीलैंड के खिलाफ मेरी आखिरी वनडे सीरीज में धोनी कप्तान थे। मैच काफी टाइट था, हमने लगभग 260–270 रन बनाए थे। जब मैं गेंदबाजी करने आया तो मेरा फोकस रन रोकने पर था, विकेट लेने पर नहीं।'
मिश्रा ने आगे बताया, 'दो ओवर के बाद धोनी मेरे पास आए और बोले कि मैं अपनी नैचुरल गेंदबाजी नहीं कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि ज्यादा मत सोचो, जैसा हमेशा गेंदबाजी करते हो वैसा ही करो। मैंने वैसा ही किया और मुझे विकेट मिल गया। उन्होंने कहा 'यही तुम्हारी गेंदबाजी है, इसी तरह डालो।' वो स्पेल मैच बदलने वाला साबित हुआ। मैंने पांच विकेट लिए और वो मेरा सबसे बेहतरीन स्पेल था।'