आमिर सोहेल के साथ उस मैच में अपनी टक्कर को याद करते हुए वेंकटेश ने कहा- हम विश्व कप का क्वार्टर फाइनल बेंगलुरु में खेल रहे थे। हम हार जाते तो बाहर हो जाते। हमें जीतना ही था। हमारा एक अच्छा स्कोर बना। नवजोत सिंह सिद्धू ने मैच में बहुत रन बनाए थे। जब पाकिस्तान बैटिंग करने उतरा तो लगा कि वो 40 ओवर में ही मैच खत्म कर देंगे। तब एक विकेट की दरकार थी। उनकी अच्छी साझेदारी चल रही थी। तब मुझे गेंद दी गई।
वेंकटेश ने कहा- सोहेल ने कवर पॉइंट पर एक चौका लगाया। तब मैंने दर्शकों को देखा। वे एकदम चुप थे। मैदान पर हम खिलाड़ियों के बीच बहुत तनाव था और दर्शकों के बीच भी सब शांत थे। उस वक्त आमिर मेरे पास आया और बैट दिखाकर बोला कि अगली गेंद पर भी उधर ही मारूंगा। आज भी वो यह बात नहीं मानते। फिर मैंने सोचा कि गेंद कहां डालूं। तब मैंने सोचा कि मुझे अपनी काबिलियत पर भरोसा रखना है। मैं दौड़ा, भरोसा जुटाया और सोचा कि उसे करने दो, जो करना है। मैंने तय किया कि मैं स्टंप पर ही डालूंगा, इधर-उधर नहीं डालूंगा। सोहेल में अहंकार था, उसने वहीं पर वो शॉट मारना चाहा, लेकिन क्लीन बोल्ड हो गया।
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी की थी और नवजोत सिंह सिद्धू ने ओपनिंग करते हुए 115 गेंदों पर 11 चौके की मदद से 93 रन बनाए थे। इसके अलावा सचिन तेंदुलकर ने 31 रन, संजय मांजरेकर ने 20 रन, मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 27 रन, विनोद कांबली ने 24 रन, नयन मोंगिया ने तीन रन, अनिल कुंबले ने 10 रन रन की पारी खेली थी। अजय जडेजा ने 25 गेंदों में चार चौके और दो छक्के की मदद से 45 रन की तूफानी पारी खेली थी। पाकिस्तान की ओर से वकार यूनुस और मुश्ताक अहमद ने दो-दो विकेट लिए थे। वहीं, आकिब जावेद, अतर उर रहमान और आमिर सोहेल को एक-एक विकेट मिला था।
जवाब में पाकिस्तान के लिए आमिर सोहेल और सईद अनवर ने 84 रन की ओपनिंग साझेदारी की थी। सईद को श्रीनाथ ने आउट किया था, जबकि सोहेल को वेंकटेश ने बोल्ड किया था। इसके बाद तो पाकिस्तानी टीम नौ विकेट पर 248 रन ही बना सकी थी। सोहेल ने 46 गेंदों में नौ चौके और एक छक्के की मदद से 55 रन और सईद अनवर ने 32 गेंदों में पांच चौके और दो छक्के की मदद से 48 रन बनाए थे। इसके बाद इजाज अहमद 12 रन, इंजमाम उल हक 12 रन, सलमी मलिक 38 रन, जावेद मियांदाद 38 रन, राशिद लतीफ 26 रन बनाकर आउट हुए थे। मुश्ताक अहमद और अतर उर रहमान खाता भी नहीं खोल सके थे। वेंकटेश और अनिल कुंबले ने तीन-तीन विकेट लिए थे। वेंकटेश ने 10 ओवर में सिर्फ 45 रन खर्च किए थे। इसके अलावा श्रीनाथ और वेंकटपति राजू को एक-एक विकेट मिला था। भारत ने यह मैच 39 रन से जीता था। नवजोत सिद्धू को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था।
वेंकटेश ने मैच को याद करते हुए युवाओं को सीख दी। उन्होंने कहा- आपको आक्रामक होना जरूरी होता है, लेकिन आपको इसी के साथ यह भी याद रखना होता है कि हमें करना क्या है। आक्रामकता को नियंत्रित करने की जरूरत होती है। मानसिक तौर पर मजबूत रहें। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें। वेंकटेश का वनडे में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हमेशा अच्छा रहा है। वह पाकिस्तान के खिलाफ इस फॉर्मेट में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। इस टीम के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछे जाने पर वेंकटेश ने कहा- मैं नहीं जानता कि ऐसा क्यों होता था, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ ही मैंने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की है।
वेंकटेश ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 33 टेस्ट और 161 वनडे खेले। टेस्ट में उनके नाम 96 विकेट और वनडे में 196 विकेट हैं। टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 33 रन देकर छह विकेट है, जबकि वनडे में 27 रन देकर पांच विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह दोनों प्रदर्शन पाकिस्तान के खिलाफ ही हैं। 33 रन देकर छह विकेट वेंकटेश ने 1999 में भारत-पाकिस्तान चेन्नई टेस्ट में लिए थे। वहीं, 27 रन देकर पांच विकेट वेंकटेश ने 1999 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ झटके थे। तब उन्होंने सईद अनवर, सलीम मलिक, इंजमाम उल हक, अजहर महमूद और वसीम अकरम को आउट किया था। भारत ने यह मैच 47 रन से जीता था। वेंकटेश प्रसाद प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे।