वीरेंद्र सहवाग के दोनों बेटे क्रिकेटर बनना चाहते हैं
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पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने अमर उजाला संवाद में भारतीय क्रिकेट से जुड़े कई सवालों का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार और निजी जीवन को लेकर भी बात कही। अपने दोनों बेटों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके दोनों बेटे क्रिकेटर बनना चाहते हैं और सहवाग खुद उन्हें इस खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं। यहीं वजह है कि वह किसी भी टीम के साथ कोच के रूप में नहीं जुड़े हैं।
सहवाग से जब बच्चों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा "आठवीं क्लास से आप सीधे कॉलेज नहीं जा सकते। खेल में भी बहुत साल लगते हैं। आज विराट कोहली भी परफेक्ट नहीं हुए। वे भी गलती करके आउट हो जाते हैं। मेहनत आपके हाथ में है, स्किल सुधारना आपके हाथ में है। मैं अंडर-14, 15, 16, 17 कुछ नहीं खेला। बाद में मुझे मौके मिले और मैं रन बनाते चला गया। मैं एक स्कूल चलाता हूं। उसमें मैं सिर्फ सुविधा दे सकता हूं। वहां सीखने वाले हर बच्चे को मेहनत खुद करनी पड़ेगी। मौके मिलने पर परफॉर्म करना होगा तभी आगे मौके मिलेंगे"
एक क्रिकेटर के रूप में खुद की यात्रा पर सहवाग ने कहा "मैंने प्रैक्टिस कम की, मैंने बसों में धक्के ज्यादा खाए हैं। ढाई घंटे बस में बैठकर 12 मिनट की बैटिंग करने को मिलती थी। मैं फील्डिंग की प्रैक्टिस करता था। मेहनत तो मैदान पर दूसरों से ज्यादा ही करता था। जिस दिन आपका दिन हो, उस दिन आपको आउट नहीं होना है। चेन्नई में जब मैच था, उस दिन मैंने कहा कि भगवान आज अगर मेरा दिन है तो दक्षिण अफ्रीका टीम तो गई। उस दिन मैंने 309 रन बनाए।"
अपने बच्चों के बारे में बात करते हुए सहवाग ने कहा "मैं बच्चों से भी कहता हूं कि ऐसी नौबत न आए कि बाप को सिफारिश करनी पड़े। आप ऐसा प्रदर्शन करो कि सभी बोलें कि आपका बेटा अच्छा खेलता है। मेरे दो बेटे हैं। दोनों क्रिकेट खेलते हैं और ऑलराउंडर बनना चाहते हैं।" इस पर सहवाग ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आईपीएल में ऑलराउंडर महंगे बिकते हैं। इसी वजह से ये दोनों ऑलराउंडर बनना चाहते हैं।