वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मैच में दीपक हुड्डा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। हुड्डा को गेंदबाजी के छठें विकल्प के तौर पर खिलाया गया था। हालांकि, कप्तान रोहित ने उनसे गेंदबाजी ही नहीं कराई। भारत के पांच मुख्य गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया और विंडीज की टीम सिर्फ 43.5 ओवर में 176 रन पर सिमट गई। इस मैच में रोहित को छठें गेंदबाज की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन उन्होंने छठें विकल्प से एक ओवर कराने के बारे में भी नहीं सोचा। यही गलती लोकेश राहुल ने भी की थी। उन्होंने अय्यर से पहले मैच में कोई ओवर नहीं कराया था। इसके बाद अय्यर को टीम से बाहर कर दिया गया।
दक्षिण अफ्रीका दौरे में वेंकटेश अय्यर को ऑलराउंडर के रूप में चुना गया था, लेकिन पहले मैच में उनसे गेंदबाजी नहीं कराई गई। बाद में अय्यर के हाथ में गेंद दी गई, लेकिन वो कुछ खास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्हें वनडे टीम से बाहर कर दिया गया और अब वो सिर्फ टी-20 टीम का हिस्सा हैं। यही हाल दीपक हुड्डा का हो सकता है। पहले मैच में उनसे गेंदबाजी नहीं कराई गई और बाद के मैचों में गेंद से अच्छा प्रदर्शन न करने पर उन्हें भी टीम से बाहर किया जा सकता है।
रोहित और राहुल ने क्या गलती की
रोहित शर्मा ने दीपक हुड्डा और लोकेश राहुल ने वेंकटेश अय्यर से शुरुआत में गेंदबाजी नहीं कराई। वहीं सीधे मुश्किल हालात में इन गेंदबाजों को मौका देने पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करना गलत होगा। किसी भी खिलाड़ी को ऑलराउंडर बनाने के लिए जरूरी है कि हर मैच में उससे कुछ ओवर कराए जाएं। रोहित और राहुल दोनों ने यही गलतियां की है कि जब मुख्य गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन करते हैं तब ऑलराउंडर को गेंदबाजी नहीं दी।
धोनी से सीखने की जरूरत
सुरेश रैना और केदार जाधव जैसे खिलाड़ी अपनी गेंदबाजी के लिए नहीं जाने जाते थे, लेकिन धोनी ने इन खिलाड़ियों से अक्सर गेंदबाजी कराई और एक समय बाद ये दोनों ही खिलाड़ी भारतीय टीम में ऑलराउंडर के रूप में खेल रहे थे। खासकर बड़ी साझेदारी होने पर अक्सर केदार और रैना विकेट लेकर जाते थे। इसकी वजह यही थी कि धोनी इन खिलाड़ियों को गेंदबाजी करने का मौका देते थे। अक्सर पावरप्ले खत्म होने के बाद धोनी पार्ट टाइम गेंदबाजों से गेंदबाजी कराते थे, लेकिन रोहित और राहुल ने ऐसा नहीं किया।
अगर दीपक हुड्डा और वेंकटेश अय्यर से लगातार गेंदबाजी कराई जाती है और हर मैच में उन्हें कुछ ओवर करने का मौका मिलता है तो ये खिलाड़ी अलग-अलग हालातों में गेंदबाजी करने के अभ्यस्त होंगे। इससे वो एक गेंदबाज के रूप में और बेहतर होंगे और मुश्किल हालातों में गेंदबाजी मिलने पर भी उन्हें खुद पर विश्वास होगा और अच्छी गेंदबाजी कर पाएंगे।