भारतीय टीम की स्थिति दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में अच्छी नहीं है। भारत पर गुवाहाटी टेस्ट में हार का खतरा मंडरा रहा है। भारत को आखिरी दिन जीत के लिए 522 रन बनाने हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका को क्लीन स्वीप के लिए आठ विकेट चाहिए। हालांकि, टीम के अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा इससे ज्यादा परेशान नहीं है। जडेजा की बातों से लगा कि टीम की नजरें दूसरा टेस्ट ड्रॉ कराने पर टिकी हुई हैं।
जडेजा बोले- परिणाम का अगली सीरीज में नहीं पड़ेगा असर
जडेजा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में संभावित हार का अगले साल अगस्त में श्रीलंका में होने वाली टेस्ट सीरीज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दूसरे टेस्ट में ड्रॉ कराना युवा टीम के लिए जीत जैसा होगा। दिन के खेल की समाप्ति पर जडेजा ने कहा, मुझे नहीं लगता कि इसका अगली सीरीज पर कोई असर पड़ेगा। लेकिन एक क्रिकेटर के तौर पर कोई भी सीरीज हारना नहीं चाहता, विशेषकर भारत में। इसलिए उम्मीद है कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने की कोशिश करेंगे। हम कल अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे। हम टेस्ट मैच बचाने की कोशिश करेंगे। अगर हम सीरीज नहीं भी जीत रहे हैं तो भी हम मैच ड्रॉ कर सकें जो हमारे लिए जीत की तरह की स्थिति होगी।
'युवाएं के लिए बहुमूल्य होगा'
अगले कुछ हफ्तों में 37 बरस के होने वाले जडेजा का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज गंवाना भारतीय टीम में शामिल युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने के लिहाज से बहुमूल्य होगा। जडेजा ने कहा, देखिए टीम में जो युवा खिलाड़ी हैं, मुझे लगता है कि वे सीखने के चरण में हैं। उनका करियर शुरू हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आप चाहे कोई भी प्रारूप खेलें, यह आसान नहीं है। आप चाहे कोई भी प्रारूप खेलें, यह हमेशा थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। भारत में जब ऐसी स्थिति होती है और आप टीम में तीन-चार युवा खिलाड़ियों को खिलाते हैं तो ऐसा लगता है कि पूरी टीम युवा और कम अनुभव वाली है। और इसे सुर्खियां बनाया जाता है। लेकिन जब भारत स्वदेश में जीतता है तो लोग सोचते हैं कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन अगर आप भारत में कोई श्रृंखला हार जाते हैं तो यह बहुत बड़ी बात बन जाती है।
कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि क्रिकेट परिस्थितियों पर आधारित खेल है और जब भातर ने पहली पारी में बल्लेबाजी की तो हालात अनुकूल नहीं थे। जडेजा ने कहा, ईमानदारी से कहूं तो एक गेंदबाज के तौर पर जब हम शुरुआती दो दिन गेंदबाजी कर रहे थे तो विकेट पर कोई निशान नहीं थे। विकेट शीशे की तरह चमक रहा था। और जब वे गेंदबाजी करने आए तो तेज गेंदबाजों के विकेट लेने की वजह से स्पिनरों को अधिक मौका मिला और उनकी गेंद टर्न कर रही थी और उछाल ले रही थी।