यूं तो क्रिकेट में हार-जीत तो लगी ही रहती है लेकिन कभी ये हार उस टीम के लिए इस कदर नागवार गुजरती है जिसे हारने की आदत ही न हो। मुंबई की टीम का रणजी क्रिकेट में जबर्दस्त दबदबा रहा है और उसे महज हरा देने में विपक्षी टीम अपनी ऐतिहासिक जीत के रूप में आंकते थे।
मुंबई टीम से ही सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर और सचिन तेंदुलकर जैसे ढेरों महान क्रिकेटर दिए हैं। लेकिन लगता है कि टीम में अब वह धार नहीं रही, कभी टीम इंडिया में मुंबई से आने वाले खिलाड़ियों की भरमार हुआ करती थी जो अब नहीं दिखती है। संभवतः इसी का खामियाजा मुंबई टीम ने भुगता और रणजी ट्रॉफी में राउंड रॉबिन मुकाबले में तमिलनाडु के हाथों महज 3 दिन में ही एक पारी और 44 रनों से मैच गंवा दिया।
मैच में किसी टीम को हार तो किसी को जीत मिलती ही है लेकिन यह हार मुंबई के लिए बेहद शर्मनाक साबित हुई क्योंकि 1951 यानी 64 सालों के लंबे अंतराल के बाद उसे देश की सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट टूर्नामेंट में पारी के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। जहां तक ओवरऑल रिकॉर्ड की बात है तो यह रणजी इतिहास में उसकी महज चौथी पारी की हार है। इस हार से पहले उसने आखिरी बार 1951 में पारी के अंतर से मैच गंवाया था।
इस ऐतिहासिक करारी हार के बाद मुंबई के रणजी कप्तान सूर्य कुमार यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह एक नए क्रिकेटर को टीम की कमान सौंप दी गई।
महेंद्र सिंह धोनी जैसी तिहरी भूमिका निभाएगा नया कप्तान
सूर्य कुमार यादव एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं लेकिन वह अपनी अगुवाई में मुंबई टीम के इस शानदार रिकॉर्ड को बचाए नहीं रख सके और उन्हें अपनी कप्तानी गंवानी पड़ी। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने उनकी जगह आदित्य तारे को नया कप्तान चुन भी लिया है।
तारे मुंबई के विकेटकीपर और बल्लेबाज भी हैं और कप्तानी मिलने के बाद उनके पास तिहरी भूमिका आ गई है जिसे संभालना उनके लिए चुनौती जैसी होगी। वैसे भी टीम इंडिया की कमान जिस महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में वह भी तिहरी भूमिका निभाते हैं यानी टीम के विकेटकीपर, बल्लेबाज और कप्तान। तारे मुंबई टीम के नियमित सदस्य हैं।
नए कप्तान के रूप में तारे के पास जबर्दस्त दबाव होगा क्योंकि मुंबई का प्रदर्शन इस सत्र में अब तक बेहद खराब रहा है। खुद तारे भी अब तक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। उन्होंने इस सत्र में 9 पारियों में महज 199 रन बनाए हैं लेकिन संदीप पाटिल की अगुवाई वाली चयन समिति ने सूर्यकुमार यादव की तुलना में तारे को बेहतर उम्मीदवार माना।
दिलचस्प यह है कि यादव भले ही टीम को जीत नहीं दिला सके हों लेकिन बल्ले से वह काफी प्रभावी रहे और उन्होंने 53.88 की औसत से 2 शतकों के साथ 485 रन बनाए हैं। श्रेयस अय्यर (495 रन) के बाद मुंबई के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं यादव।
हार ही नहीं साथियो के साथ गाली-गलौच करने के लगे हैं आरोप
सूर्य कुमार यादव ने ऐसे समय में मुंबई की कप्तानी छोड़ी जब टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। हार के अलावा उन पर अपने ही खिलाड़ियों के साथ बदतमीजी करने और गाली-गलौच करने के आरोप लगे हैं। टीम के कुछ खिलाड़ियों ने अपने अधिकारियों से मैदान पर और ड्रेसिंग रूम में कप्तान यादव के अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया।
मुंबई के लिए यह सत्र बेहद खराब रहा और अब टीम रणजी ट्रॉफी में बाहर होने की कगार पर है। ग्रुप-ए में शामिल टीम के पिछले 6 मैचों से महज 11 अंक हैं और अंक तालिका में छठे स्थान पर है। उसे सिर्फ एक जीत उत्तर प्रदेश पर मिली है। मुंबई अपने घर में जम्मू-कश्मीर के हाथों हार चुकी है।
यादव को टीम की कमान जहीर खान और रोहित शर्मा की अनुपस्थिति के कारण सौंपी गई थी। उन्हें अभिषेक नायर की जगह प्राथमिकता दी गई जिन्होंने जहीर खान की अनुपस्थिति में पिछले सत्र में टीम की अगुवाई की थी।