दिसंबर, 2004 में जब इंग्लैंड की टीम ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था, तब मुझे पहली बार टेस्ट क्रिकेट टीम में जगह मिली। इसके अगले साल ऑस्ट्रेलिया का दौरा मेरे लिए दुःस्वप्न जैसा था, मैंने छह पारियों में सिर्फ 152 रन बनाए। 2007 में मुझे विश्व कप में पहली बार खेलने का मौका मिला, पर मैं कुछ खास नहीं कर पाया। लेकिन 2008 में मैंने पहले दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज के रूप में अहमदाबाद में हुए दूसरे टेस्ट मैच में भारत के खिलाफ दोहरा शतक जड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। किसी क्रिकेटर के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि उसे क्रिकेट के तीनों रूप टेस्ट, वन डे और ट्वंटी-20 में अपने देश की टीम की कप्तानी करने का अवसर मिले।