तीसरे क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार के साथ ही पाकिस्तान का 23 साल बाद वर्ल्ड कप जीतने का इंतजार और बढ़ गया। मैच से पहले माना जा रहा था कि पाक टीम ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 1992 वाले अंदाज में चुनौती देगी लेकिन उसके खिलाड़ी दोहराने से चूक गए।
मिस्बाह की अगुवाई वाली पाक टीम को ऑस्ट्रेलिया ने 97 गेंद शेष रहते 6 विकेट से रौंद दिया और सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। ऑस्ट्रेलिया 2007 के बाद पहली बार अंतिम चार में पहुंचने में सफल रहा है।
पाक यह मैच जीत सकता था अगर उसकी ओर से यह 5 बड़ी गलतियां न हुई होती। आइए, जानते हैं पाक की हार में उसकी 5 बड़ी गलतियां क्या रही।
पहला, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लेने के बाद अहमद शहजाद और सरफराज अहमद की जोड़ी टीम को अच्छी शुरुआत देने में नाकाम रही। ये जोड़ी अपनी टीम के लिए वर्ल्ड कप की सबसे बेहतरीन जोड़ी है और इसे एक शानदार शुरुआत देने की जिम्मेदारी लेनी थी। लेकिन न सिर्फ यह जोड़ी नाकाम रही बल्कि दोनों बल्लेबाज सस्ते में आउट हो गए।
दूसरा, पाक टीम की ओर से दूसरी सबसे बड़ी गलती रही पाक के कप्तान मिस्बाह उल हक का खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गंवाना। इससे पहले उन्हें 2 बेहद आसान जीवनदान भी मिला। एक जीवनदान यह भी रहा कि गेंद बेल्स से टकराकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई। गेंद से छूने के बावजूद बेल्स नहीं गिरी जिससे वह सुरक्षित रहे लेकिन अपना विकेट ज्यादा देर तक बचा कर नहीं रख सके।
तीसरा, पाक बल्लेबाजी के मध्य क्रम का नाकाम होना। शीर्ष क्रम के लड़खड़ाने के बाद पाक को उम्मीद थी कि उसका मध्य क्रम टीम को संकट से बाहर निकालेगा लेकिन ये भी नाकाम हो गए। कप्तान मिस्बाह उल हक, उमर अकमल, सोहैब मकसूद, शाहिद अफरीदी और वहाब रियाज बल्ले से बुरी तरह से नाकाम रहे।
चौथा, पाक की हार का चौथा और सबसे अहम कारण नाजुक मौकों पर कैच टपकाना रहा। तेज गेंदबाज वहाब रियाज ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जबर्दस्त माहौल बनाया लेकिन क्षेत्ररक्षकों ने इसे सफल होने नहीं दिया। उनकी गेंद पर शेन वॉटसन और ग्लेन मेक्सवेल के आसान कैच टपकाए गए। शुरुआत में जीवनदान पाने के बाद वॉटसन ने अर्धशतक ठोंक दिया। मैक्सवेल ने 29 गेंदों में नाबाद 44 रन बनाए।
पांचवां, तेज गेंदबाज वहाब रियाज की लय देखकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के होश फाख्ता हो गए। लेकिन उनके साथ दिक्कत यह रही कि उन्हें अन्य गेंदबाज बढ़िया साथ नहीं दे सके। अकेले अपने दम पर वह टीम को जीत नहीं दिला सकते थे।