बीसीसीआई और आईसीसी के बीच चल रही तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। बीसीसीआई ने आईसीसी अगले साल इंग्लैंड में आयोजित होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी से अपना नाम वापस लेने की धमकी दी है। भारत ने यह धमकी आईसीसी द्वारा उसके साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार के कारण दी है। बीसीसीआई का कहना है कि आईसीसी भारत के साथ पक्षपात कर रहा है। दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के विरुद्ध अपनी इस लड़ाई में एशिया सहित दुनिया के अन्य बोर्डों का समर्थन हासिल किया है। इसके साथ ही उसने आईसीसी के कई प्रस्तावों का विरोध किया है जिसमें टेस्ट मैचों के द्विस्तरीय आयोजन का प्रावधान भी शामिल है।
आईसीसी फाइनेंशिलय बोर्ड की मीटिंग में नहीं बुलाने के कारण है नाराजगी
अनुराग ठाकुर
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ताजा मामला आईसीसी की फाइनेंशिलय बोर्ड की मीटिंग से जुड़ा है, इसकी बैठक नहीं बुलाए जाने की वजह से बीसीसीआई नाराज है और उसने चैंपियनशिप के बहिष्कार की धमकी दी है। आईसीसी ने इंग्लैंड को चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के लिए इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड को 13.5 करोड़ डॉलर आवंटित किए हैं, जबकि इसी साल भारत में आयोजित टी20 विश्वकप के लिए उसे केवल 4.5 करोड़ डॉलर मिले थे। अवंटित राशि में बड़ा अंतर भारत की नाराजगी का कारण है।भारत का तर्क है कि चैंपियंस ट्रॉफी में 19 दिन में केवल 15 मैच खेले जाने हैं जबकि भारत में आयोजित टी-20 विश्वकप के दौरान 27 दिन में महिला और पुरुष वर्ग के कुल 58 मैच खेले गए थे। लगभग चार गुना मैच आयोजित करने के लिए बीसीसीआई को ईसीबी की तुलना में एक तिहाई रकम मिली थी। बीसीसीआई ने इसकी शिकायत आईसीसी से की थी। इसके बाद भारत की शिकायत के संदर्भ में आईसीसी ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमें भारत को नहीं बुलाया गया।
बीसीसीआई के सचिव अजय शिर्के का कहना है कि फाइनेंस, कॉमर्स और एग्जीक्यूटिव कमेटी में सभी अहम फैसले लिए जाते हैं और इन कमेटियों में भारत का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इनमें भारत का प्रतिनिधित्व न होना भारत को बेइज्जत करने जैसा है। हम आईसीसी से अनुरोध करेंगे कि इसमें बदलाव करे नहीं तो हमें फैसला करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें अपने हितों के लिए क्या करना है। हम चैंपियंस ट्रॉफी से अपना नाम वापस ले सकते हैं, ऐसा न करके कुछ और किया जा सकता है हमारे पास कई विकल्प हैं।
आईसीसी ने वापस लिया द्वि-स्तरीय टेस्ट के आयोजन का प्रस्ताव
अनुराग ठाकुर
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आईसीसी के बिग थ्री रेवेन्यु शेयरिंग फॉर्मूले पर भी बीसीसीआई और आईसीसी के बीच अनबन हुई थी, इसके मुताबिक इंग्लैंड, भारत और ऑस्ट्रेलिया को सबसे ज्यादा हिस्सा मिलने की बात थी। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर ने कहा था कि क्रिकेट को तीन देशों द्वारा संचालित होता नहीं देखना चाहूंगा। यह सुनने में तो बहुत अच्छा लगेगा कि भारत को रेवेन्यु में 22 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा लेकिन इससे अमीर बोर्ड और अमीर और गरीब और गरीब बोर्ड हो जाएंगे।
इसके अलावा भारत ने द्वि-स्तरीय टेस्ट के आयोजन का भी विरोध किया, जिसमें टॉप टीमों के टॉप टीमों के साथ और निचली टीमों के साथ निचली टीमों के मैच कराए जाने की बात कही जा रही थी। श्रीलंका ने इसके विरोध में भारत से समर्थन मांगा था और कहा था कि इससे निचली टीमों को रेवेन्यु का बड़ा नुकसान होगा। बीसीसीआई के विरोध और उसे दूसरी टीमों का सहयोग मिलता देख आईसीसी को बुधवार को इस प्रस्ताव को वापस लेना पड़ा।