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What is BCCI Central Contract: क्या कोहली-रोहित का होगा डिमोशन? ग्रेड 'ए+' से 'बी' में भेजे जा सकते हैं, जानें

Tue, 20 Jan 2026 01:07 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बीसीसीआई अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है, जिसमें A+ कैटेगरी को समाप्त करने का प्रस्ताव है। यदि प्रस्ताव पास होता है, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा को ‘ग्रेड B’ में रखा जा सकता है। चयन समिति ने यह बदलाव फॉरमैट-आधारित उपलब्धता और परफॉर्मेंस के आधार पर सुझाए हैं। बोर्ड की अगली बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा।
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रोहित और कोहली - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने वार्षिक सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी में है। न्यूज एजेंसी एएनआई के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट संरचना में सबसे प्रीमियम ए+ कैटेगरी को स्क्रैप यानी हटाने/बंद करने करने का प्रस्ताव है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, विराट कोहली और रोहित शर्मा नए मॉडल में 'ग्रेड बी' में रखे जा सकते हैं।
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ए+ कैटेगरी खत्म करने का प्रस्ताव क्यों?
चयन समिति, जिसका नेतृत्व पूर्व क्रिकेटर अजीत अगरकर कर रहे हैं, उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर को सरल और प्रैक्टिकल बनाने की दिशा में बदलाव सुझाए हैं। प्रस्तावित मॉडल के मुताबिक,
  • ए+ कैटेगरी हटेगी
  • केवल 3 कैटेगरी होंगी- ए, बी या सी

ए+ कैटेगरी में आने वाले खिलाड़ियों की वार्षिक सैलरी अभी सात करोड़ रुपये है। इसे हटाकर संरचना को अधिक परफॉर्मेंस-आधारित बनाने की कोशिश मानी जा रही है। अगली अपेक्स काउंसिल मीटिंग में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है।
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रोहित-कोहली - फोटो : PTI
क्या सच में कटेगी रोहित-कोहली की सैलरी?

मौजूदा परिदृश्य में:

• कोहली और रोहित सिर्फ वनडे पर फोकस करते हैं।
• टी20 अंतरराष्ट्रीय से दोनों 2024 में संन्यास ले चुके हैं।
• टेस्ट से भी दोनों ने पिछले साल संन्यास ले लिया था।

बोर्ड इसे देखते हुए, एक ग्रेड कम करने पर विचार कर रहा है। ए+ हटा दिए जाने पर ए श्रेणी केवल ऑल-फॉर्मेट खिलाड़ियों के लिए रखी जा सकती है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि दोनों को बी ग्रेड में डाला जा सकता है। जबकि ग्रेड ए में तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी हो सकते हैं। 

रोहित-कोहली - फोटो : PTI
अभी की कॉन्ट्रैक्ट संरचना कैसी है?
ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ खिलाड़ियों को एक साल का वेतन देने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह बीसीसीआई का एक सुव्यवस्थित मॉडल है जिसके जरिए प्रदर्शन, निरंतरता, क्रिकेट के अलग-अलग प्रारूपों में योगदान और चयनकर्ताओं के मूल्यांकन के आधार पर खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बीसीसीआई ने कई चौंकाने वाले फैसले भी लिए, जिसकी कभी सराहना हुई तो कभी आलोचना झेलनी पड़ी। केंद्रीय अनुबंध में जगह बनाने के लिए बीसीसीआई ने पिछले चक्र में कुछ बदलाव भी किए थे। 

बीसीसीआई ने जब साल 2024-2025 के लिए खिलाड़ियों के वार्षिक अनुबंध की सूची का एलान किया था, तो उस लिस्ट में कुल 34 खिलाड़ी थे। चार खिलाड़ियों को ए+ ग्रेड में रखा गया था। वहीं, छह खिलाड़ियों को ए ग्रेड में रखा गया था। पांच खिलाड़ी बी ग्रेड और 19 खिलाड़ी सी ग्रेड में थे।

भारतीय टीम - फोटो : BCCI
मौजूदा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट कैसे काम करता है?
  • बीसीसीआई हर साल खिलाड़ियों को चार ग्रेड में बांटता है-  ए+ (A+), ए (A), बी (B), और सी (C)। हर ग्रेड के साथ एक तय सालाना वेतन जुड़ा होता है, जिसे रिटेनर फीस कहा जाता है। सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाली राशि मैच फीस से अलग होती है, यानी खिलाड़ी चाहे जितने मैच खेलें, यह वार्षिक रिटेनर तय रहता है।
  • ए+ ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना सात करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें गिने चुने और नामी क्रिकेटर होते हैं।
  • ए ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना पांच करोड़ रुपये सैलरी मिलती। इसमें भी अहम खिलाड़ियों को जगह दी जाती है।
  • बी ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना तीन करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें ज्यादातर वो खिलाड़ी होते हैं, जो एक या दो फॉर्मेट में खेल रहे हों, लेकिन कोर टीम का हिस्सा हैं।
  • सी ग्रेड में आने वाले क्रिकेटरों को सालाना एक करोड़ रुपये सैलरी मिलती है। इसमें वो खिलाड़ी होते हैं, जिनकी टीम में जगह हमेशा पक्की न हो या फिर जिन्हें ज्यादा मैचों का अनुभव न हो। या फिर किसी एक फॉर्मेट में तय मैच खेल चुके हों। इसमें खिलाड़ियों की एंट्री होती रहती है।

मौजूदा नीति के अनुसार क्रिकेटरों के ग्रेड कैसे तय होते हैं...
  1. फॉर्मेट प्राथमिकता और टेस्ट क्रिकेट का महत्व: बीसीसीआई की नीति में टेस्ट क्रिकेट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में खेलते हैं, या फिर टेस्ट में बड़ा योगदान देते हैं, उन्हें ए+ ग्रेड मिलता है। इसी आधार पर उम्मीद है कि भारत के टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल को आने वाले चक्र में ए+ श्रेणी में शामिल किया जा सकता है।
  2. प्रदर्शन और निरंतरता सबसे अहम: खिलाड़ियों का ग्रेड उनके पिछले कॉन्ट्रैक्ट साइकिल के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर प्रमोशन दिया जाता है। वहीं, फॉर्म, फिटनेस या भागीदारी में गिरावट पर डिमोशन दिया जाता है।इसी वजह से कोहली और रोहित की स्थिति पर चर्चा शुरू हुई है।
  3. न्यूनतम मैच खेलने का नियम: किसी भी खिलाड़ी को ग्रेड सी के लिए पात्र बनने के लिए न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने होते हैं। जैसे किसी एक खिलाड़ी को सी ग्रेड में शामिल होने के लिए तीन टेस्ट, आठ वनडे या 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलना जरूरी है। सिर्फ ज्यादा मैच खेलने से उच्च ग्रेड नहीं मिलता, फॉर्मेट की प्राथमिकता और प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण है।
  4. घरेलू क्रिकेट में उपस्थिति अनिवार्य: हाल के वर्षों में बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि जो खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए नहीं खेल रहे हैं, उन्हें घरेलू क्रिकेट, खासकर रणजी ट्रॉफी खेलना होगा। इस नियम का पालन न करने पर कई खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट से बाहर भी किया गया है। श्रेयस अय्यर और ईशान किशन इसका सटीक उदाहरण हैं।

कोहली और रोहित - फोटो : ANI
क्या सैलरी संरचना भी बदलेगी? RO-KO को कितना नुकसान?
ए+ ग्रेड वालों को सात करोड़ रुपये मिलते हैं और ए ग्रेड वालों को पांच करोड़। अभी स्पष्ट नहीं है कि बदलाव केवल कैटेगरी तक सीमित होंगे या मानदेय में भी बदलाव होगा। यानी रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि ए श्रेणी वालों को कितनी सैलरी मिलेगी। अगर ए श्रेणी वालों को पांच करोड़ ही दिया जाएगा तो बी श्रेणी वालों को तीन करोड़ रुपये मिलेंगे। यानी दोनों खिलाड़ियों को चार-चार करोड़ रुपये प्रति वर्ष की कमी झेलनी पड़ सकती है।

भारतीय टीम - फोटो : ANI
इन बदलावों के पीछे क्या सोच?
इन बदलावों को समझने के लिए कुछ संभावित कारण देखे जा सकते हैं-
नई पीढ़ी का प्रदर्शन: टी20 और टेस्ट में युवा खिलाड़ी ज्यादा सक्रिय हैं।
फॉर्मेट स्पेशलाइजेशन: अब खिलाड़ी एक-दो फॉरमैट पर ही ध्यान देते हैं।
सिलेक्शन पारदर्शिता: कॉन्ट्रैक्ट को मैच उपलब्धता और फिटनेस से जोड़ना।
वैश्विक ट्रेंड: ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड जैसे देशों में भी फॉर्मेट-आधारित तर्ज अपनाया गया है।
 
साल 2024-25 के लिए किस ग्रेड में कौन सा खिलाड़ी था
ए+
(सैलरी: 7 करोड़)

(सैलरी: 5 करोड़)
बी
(सैलरी: 3 करोड़)
सी
(सैलरी: 1 करोड़)
रोहित शर्मा हार्दिक पांड्या सूर्यकुमार यादव रिंकू सिंह
विराट कोहली शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल रवि बिश्नोई
जसप्रीत बुमराह ऋषभ पंत श्रेयस अय्यर अर्शदीप सिंह
रवींद्र जडेजा मोहम्मद शमी अक्षर पटेल सरफराज खान
  मोहम्मद सिराज कुलदीप यादव आकाश दीप
  केएल राहुल   तिलक वर्मा
      वॉशिंगटन सुंदर
      प्रसिद्ध कृष्णा
      नीतीश रेड्डी
      वरुण चक्रवर्ती
      ऋतुराज गायकवाड़
      मुकेश कुमार
      रजत पाटीदार
      ईशान किशन
      शिवम दुबे
      संजू सैमसन
      ध्रुव जुरेल
      अभिषेक शर्मा
      हर्षित राणा

साल 2023-24 में किस ग्रेड में कौन से खिलाड़ी थे
ग्रेड खिलाड़ी
ए+ (4 खिलाड़ी) रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा
 (6 खिलाड़ी) आर अश्विन, मो. शमी, मो. सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या
बी (5 खिलाड़ी) सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, यशस्वी जयसवाल
सी (15 खिलाड़ी) रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, शार्दुल ठाकुर, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, जितेश शर्मा, वॉशिंगटन सुंदर, मुकेश कुमार, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, केएस भरत, प्रसिद्ध कृष्णा, आवेश खान, रजत पाटीदार
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भारतीय टीम - फोटो : ANI
क्या यह बदलाव विवाद खड़ा कर सकता है?
कोहली और रोहित भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े पोस्टर्स रहे हैं। ऐसे में ए+ से हटाना और उनका ग्रेड कम करना सार्वजनिक बहस और फैंस को गुस्सा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संकेत मिलता है कि भारतीय क्रिकेट ट्रांजिशन फेज में है, जहां नए सितारों को जगह दी जा रही है। अब सभी की नजरें बीसीसीआई की अगली बैठक पर टिकी रहेंगी।
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