भारत में रणजी ट्रॉफी के दो मुकाबलों में अंपायरिंग करने वाले ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर यहां के अनुभव को जिंदगी भर याद रखना चाहते हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के बीच अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भारत आए ट्रेलोर ने कहा कि यहां उन्हें न सिर्फ शानदार क्रिकेट देखने का मौका मिला, बल्कि कुछ अच्छे दोस्त भी मिले। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के व्यवहार, अंपायरों के बीच टीमवर्क और यहां के खानपान की भी जमकर तारीफ की।
दो रणजी मैचों में की अंपायरिंग
ट्रेलोर ने अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने रणजी ट्रॉफी के दो मुकाबलों में अंपायरिंग की। पहला मैच दिल्ली और गुजरात के बीच पालम एयर फोर्स 'बी' ग्राउंड पर खेला गया, जबकि दूसरे मुकाबले में उन्होंने मुंबई और हरियाणा के बीच बीकेसी ग्राउंड पर अंपायर की भूमिका निभाई। यह दौरा क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और बीसीसीआई के अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम का हिस्सा था। इसके तहत भारतीय अंपायर पराशर जोशी ऑस्ट्रेलिया में दो शेफील्ड शील्ड और एक वनडे कप मुकाबले में अंपायरिंग करेंगे।
ट्रेलोर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, 'भारत में अंपायरिंग का अनुभव शानदार रहा। मैं इसे याद रखूंगा। मैं अंपायरिंग करने या बाकी भारत को देखने के लिए जरूर वापस आना चाहूंगा। यह एक कमाल की जगह है और उम्मीद है कि मैं जल्द ही अपने परिवार के साथ इसे साझा कर पाऊंगा।'
प्रियांश की 199 रन की पारी और बदोनी का दोहरा शतक यादगार
भारत दौरे के दौरान ट्रेलोर को कई शानदार पारियां और गेंदबाजी प्रदर्शन देखने को मिले। उन्होंने अपनी यादगार लम्हों का जिक्र करते हुए दिल्ली के प्रियांश आर्य की 199 रन की पारी और कप्तान आयुष बदोनी के दोहरे शतक को खास बताया। इसके अलावा मुंबई के मुकाबले में अंगकृष रघुवंशी, मुशीर खान और निशांत सिंधु के शतक तथा तनुष कोटियन के 81 रन देकर आठ विकेट लेने का प्रदर्शन भी उन्हें याद रहेगा।
उन्होंने कहा, 'मेरी सबसे प्यारी यादों में प्रियांश आर्य की 199 रन की पारी, दिल्ली के कप्तान आयुष बदोनी का दोहरा शतक, मुंबई में अंगकृष रघुवंशी, मुशीर खान, निशांत सिंधु का शतक और तनुष कोटियन का 81 रन देकर आठ विकेट लेना रहेगा। इसका हिस्सा बनना और वहां रहकर इसे देखना, यह बहुत खास था।'
भारतीय अंपायरों के टीमवर्क ने जीता दिल
ट्रेलोर के मुताबिक, भारत में उनके लिए सबसे खास अनुभव अंपायरों के बीच आपसी तालमेल रहा। उन्होंने अपने साथी अंपायर विनोद शेषन, सदाशिव अय्यर और मैच रेफरी की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं बाहर से आया हूं या बस कुछ गेम के लिए उनके साथ जुड़ रहा हूं। उन सभी ने मुझे सच में शानदार महसूस कराया, टीम का हिस्सा महसूस कराया। हमने बस अपनी सारी जिम्मेदारियां साझा कीं। मेरे लिए, इन मैचों से मैं यही सबसे ज्यादा सीखूंगा, बस अंपायरों ने एक-दूसरे के लिए जो टीमवर्क दिखाया। मैंने वहां अपनी बाकी जिंदगी के लिए कुछ बहुत अच्छे दोस्त बनाए।' उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय खिलाड़ियों ने उनके साथ बेहद आत्मीयता से व्यवहार किया। खिलाड़ी मैदान पर उनके पास आते, उनसे बातचीत करते और उनके बारे में जानने की कोशिश करते थे।
दिल्ली और मुंबई की पिचों में बताया अंतर
ट्रेलोर ने दिल्ली और मुंबई की पिचों के मिजाज में अंतर को भी अपने अनुभव का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, दिल्ली की काली मिट्टी की पिच पर गेंद नीची और धीमी रहती थी, जबकि मुंबई की लाल मिट्टी की पिच शुरुआत में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार थी। उन्होंने कहा, 'दिल्ली की काली मिट्टी पर गेंदें नीची और धीमी रहती थीं, जबकि मुंबई की लाल मिट्टी ने तेज गेंदबाजों को शुरू में मदद की, लेकिन फिर टूट गई। जब आप मुंबई में होते हैं, तो गेंद थोड़ी घूमती और उछलती है। यह भी एक चुनौती होती है। गेंद कभी-कभी आपकी सोच से ज्यादा ऊपर उछल रही थी और आपकी सोच से थोड़ी ज्यादा घूम भी रही थी। इसलिए आपको गेंद को ट्रैक करने के साथ तालमेल बिठाना होगा।' ट्रेलोर ने मैचों से पहले दोनों टीमों के साथ समान सतहों पर नेट सेशन में भी हिस्सा लिया था। उनका मानना था कि इससे मैच के दौरान पिच के व्यवहार को समझने में मदद मिली।
भारत के खाने ने भी किया प्रभावित, परिवार के लिए बनाया बटर चिकन
भारत दौरे के दौरान क्रिकेट के अलावा यहां के खानपान ने भी ट्रेलोर को काफी प्रभावित किया। दिल्ली में उन्होंने स्टफ्ड आलू, शिमला मिर्च, रोटी, नान और दाल का स्वाद लिया। मुंबई में भी उन्होंने अलग-अलग तरह के खाने का आनंद लिया। ऑस्ट्रेलिया लौटने के बाद उन्होंने अपने परिवार के लिए घर पर बटर चिकन, केसर राइस और रोटी बनाई।
उन्होंने कहा, 'इंडिया में रहने से हमें अलग-अलग फ्लेवर प्रोफाइल की असली समझ मिली, और फिर यहां आकर घर पर उनकी प्रैक्टिस करना और उस अनुभव को अपने परिवार के साथ साझा करना वाकई बहुत खास था।' कुकिंग के अपने शौक पर उन्होंने हंसते हुए कहा, 'मुझे नहीं पता कि जानकार कौन है, लेकिन मुझे इसमें मजा आता है। यह क्रिकेट से हटकर कुछ ऐसा है जिसमें आप खुद को खो सकते हैं और हां, यह आपके परिवार को खुश करता है।'
11 साल की उम्र में शुरू किया था क्रिकेट खेलना
ट्रेलोर का क्रिकेट से जुड़ाव 11 साल की उम्र में शुरू हुआ था। करीब 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के साथ लॉर्ड्स क्रिकेट कोर्स किया। हालांकि, उस समय वह क्रिकेट खेलना जारी रखे हुए थे। 23-24 साल की उम्र में उन्होंने अंपायरिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआत में वह शनिवार को क्रिकेट खेलते थे और रविवार को अंपायरिंग करते थे। धीरे-धीरे अंपायरिंग के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और उन्होंने खेलना छोड़कर इसी क्षेत्र में नियमित रूप से काम करना शुरू कर दिया।
उन्होंने न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट अंपायर्स एंड स्कोरर्स एसोसिएशन से लेवल-2 एक्रेडिटेशन हासिल किया। वह करीब 21 साल से अंपायरिंग कर रहे हैं और छह साल तक एसोसिएशन में एजुकेशन ऑफिसर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। अब उनका अगला कार्यक्रम सिडनी में प्रीमियर क्रिकेट और शेफील्ड शील्ड मुकाबलों में अंपायरिंग करना है। हालांकि, वह एक बार फिर भारत लौटना चाहते हैं और इस बार अपने परिवार को भी साथ लाने की इच्छा रखते हैं।