भारत ने श्रीलंका को हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप जीता, लेकिन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने के लिए टीम मैदान पर नहीं आई। आधे घंटे से ज्यादा इंतजार के बाद भारतीय खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम लौट गईं। नकवी भी श्रीलंका को उपविजेता चेक देने के बाद समारोह बीच में छोड़कर चले गए।
दुबई में रविवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। मैदान पर हरमनप्रीत कौर की टीम की शानदार जीत का जश्न था, लेकिन मैच के बाद का माहौल ट्रॉफी से ज्यादा विवाद को लेकर चर्चा में आ गया। भारतीय टीम आधिकारिक पुरस्कार समारोह में शामिल ही नहीं हुई और एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।
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यह विवाद पिछले साल के पुरुष एशिया कप की याद दिलाने वाला रहा, जब सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी और पदक लेने से इनकार कर दिया था। 2025 के उस विवाद के बाद भी भारत को अपनी एशिया कप ट्रॉफी नहीं मिली है और वह एसीसी कार्यालय में रखी होने की बात कही गई थी।
आधे घंटे से ज्यादा चला इंतजार, फिर ड्रेसिंग रूम लौटी टीम
महिला एशिया कप फाइनल खत्म होने के बाद ट्रॉफी प्रेजेंटेशन शुरू होने में आधे घंटे से ज्यादा का समय लग गया। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर एक साथ बैठक की। इस हडल में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला भी मौजूद थे। इसके बाद फैन वीडियो में भारतीय टीम को मैदान से निकलकर ड्रेसिंग रूम की ओर जाते हुए देखा गया। खिलाड़ी फिर प्रेजेंटेशन सेरेमनी के लिए मैदान पर नहीं लौटीं। इससे साफ हो गया कि भारत ने पिछले साल के रुख को ही आगे बढ़ाया है। इस बार भी टीम ने नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार करने के बजाय समारोह से दूरी बनाए रखी।
🚨 Mohsin Naqvi stands firm while India refuse to accept the winners trophy from him. pic.twitter.com/a9bagfqxrC
श्रीलंका ने लिया उपविजेता का पुरस्कार
भारतीय टीम की गैरमौजूदगी में प्रेजेंटेशन सेरेमनी आगे बढ़ा। श्रीलंकाई कप्तान चमारी अटापट्टू ने नकवी से उपविजेता का चेक लिया। इससे पहले श्रीलंकाई खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को श्रीलंका क्रिकेट के अंतरिम प्रमुख एरॉन विक्रमरत्ने ने पदक दिए। नकवी ने अटापट्टू को पुरस्कार देने के बाद स्टेडियम से निकलना शुरू कर दिया। इसी दौरान स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई। सोशल मीडिया पर सामने आए फैन वीडियो में भीड़ की ओर से नकवी के खिलाफ 'ट्रॉफी चोर' जैसे नारे लगाए जाने का दावा किया गया। हालांकि, इन वीडियो के आधार पर इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमर उजाला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
नकवी ट्रॉफी लेकर नहीं गए, लेकिन भारत भी नहीं आया
पिछले साल पुरुष एशिया कप फाइनल के बाद नकवी ट्रॉफी लेकर उस जगह से भाग गए थे, क्योंकि भारतीय टीम ने उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। उस घटना के बाद सूर्यकुमार यादव की टीम ने बिना ट्रॉफी के मंच पर जश्न मनाया था। इस बार तस्वीर थोड़ी अलग रही। भारतीय टीम मैदान पर ही नहीं लौटी और नकवी भी श्रीलंका के पुरस्कार समारोह के बाद स्टेडियम से निकल गए। इस वजह से महिला एशिया कप की विजेता ट्रॉफी भी भारतीय खिलाड़ियों को मंच पर नहीं सौंपी जा सकी।
Mohsin Naqvi left the stadium in embarrassment after Team India refused to take the trophy from him.😂🔥 pic.twitter.com/3RnbHmtUKP
बीसीसीआई ने पहले ही साफ कर दिया था रुख
इस पूरे घटनाक्रम से पहले बीसीसीआई ने एसीसी को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दे दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने बताया था कि अगर मोहसिन नकवी प्रस्तुति समारोह में मौजूद रहे तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने यह भी बताया था कि भारतीय टीम एसीसी के उपाध्यक्ष खालिद अल जरूनी से ट्रॉफी लेने के लिए तैयार थी। लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद बीसीसीआई ने समारोह से बाहर रहने का फैसला किया।
सैकिया ने कहा, 'हमने अनुरोध किया था कि एसीसी के उपाध्यक्ष ट्रॉफी प्रदान करें, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसलिए हमारे पास प्रेजेंटेशन सेरेमनी का हिस्सा नहीं बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। किसी न किसी स्तर पर हमें दोनों ट्रॉफियां वापस मिल जाएंगी।'
कोच ने भी कहा- ट्रॉफी हो या न हो, फर्क नहीं पड़ता
भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने भी मैच के बाद इस मामले में बीसीसीआई के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, 'भारत आधिकारिक तौर पर एशिया कप चैंपियन है। ट्रॉफी हो या न हो, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बीसीसीआई का रुख है कि नकवी से ट्रॉफी नहीं लेनी है। हम इस पर कुछ नहीं कह सकते।' इससे साफ है कि भारतीय टीम का मैदान पर नहीं आना खिलाड़ियों का अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि बोर्ड के पहले से तय रुख के अनुरूप था।