वायु प्रदूषण वैश्विक चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। अतीत में हुए विभिन्न अध्ययनों ने बताया है कि वातावरण का वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार है और इसकी जद में आने वाली आबादी में बीमारी की दर काफी होती है। हमारे देश में वायु प्रदूषण को पांचवा सबसे बड़ा हत्यारा बताया जाता है, जो लगभग 62 लाख मौतों और 1.8 करोड़ स्वस्थ जीवन वर्ष के नुकसान के लिए जिम्मेदार है। हवा में मौजूद विषाक्त कण फेफड़े एवं हृदय को प्रभावित करते हैं, जिसके चलते भारत में सांस की बीमारी के कारण सर्वाधिक मौतें होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत की राजधानी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता का स्तर सबसे खराब है।
राजधानी में हवा की खराब होती गुणवत्ता के कारण मानव स्वास्थ्य के मुद्दे ने उचित ही सभी संबंधित पक्षों का ध्यान आकर्षित किया है। इस मुद्दे के कारण हाल के महीनों में न्यायपालिका एवं सरकार की तरह से कई पहल देखने को मिली, जैसे, एक खास श्रेणी के डीजल वाहनों के पंजीकरण पर तात्कालिक प्रतिबंध, नियत संख्या में वाहनों को सड़क पर लाने की अनुमति, समय से पहले भारत स्टेज VI उत्सर्जन मानक। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए हाल ही में दिल्ली की राज्य सरकार ने सम-विषम योजना के जरिये एक नवोन्मेषी समाधान निकाला। इसमें कुछ श्रेणियों में रियायतों के साथ सम तिथि वाले दिन सम संख्या वाले और विषम तिथि के दिन विषम संख्या वाले वाहनों को सड़क पर लाने की इजाजत दी गई। इसका पहला चरण एक से 15 जनवरी तक चला। इसका प्रमुख उद्देश्य दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना था। जब इस योजना के मुख्य उद्देश्य का आकलन किया गया, तो यात्रा समय में कमी और ट्रैफिक जाम से निजात और लोगों में वायु प्रदूषण के प्रति जागरूकता, आदि कई अन्य फायदे भी दिखे। दिल्ली के लोगों ने सम-विषम योजना के पहले चरण का दिल से स्वागत किया, क्योंकि सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम होने और वायु प्रदूषण में मामूली गिरावट से वे खुश थे।
दिल्ली सरकार ने काफी उम्मीद के साथ इस योजना को दोबारा 15 से 30 अप्रैल तक के लिए लागू किया है कि इससे दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा। हालांकि दोनों बार इसे पंद्रह दिन की अवधि के लिए लागू किया गया। ध्यान देने की बात है कि इसका पहला चरण सर्दी के मौसम में लागू किया गया था, जबकि दूसरा चरण अब गर्मी के मौसम में लागू किया गया है। सर्दी के मौसम में वातावरण की स्थिति स्थिर रहने के कारण प्रदूषक तत्व कम फैलाव के कारण वातावरण के भीतर ही रहते हैं। जबकि गर्मी के मौसम में, खासकर अप्रैल से जून के बीच तरंगों का प्रसार काफी होता है, इसलिए इस दौरान वायु प्रदूषण के स्तर में भारी कमी की उम्मीद की जाती है। लेकिन इसके विपरीत देखा गया कि सम-विषम योजना लागू होने के प्रथम सप्ताह में इसके पिछले सप्ताह (11 से 14 अप्रैल) की तुलना में प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा। इस बार भी हवा की गति अनुकूल नहीं थी, इसलिए इस योजना के पहले हफ्ते में वायु प्रदूषण स्तर ज्यादा था।
हालांकि वायु प्रदूषण के स्तर पर सम-विषम योजना के प्रभावों को चित्रित करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि वातावरण में हवा की गुणवत्ता को कई कारक प्रभावित करते हैं। सम-विषम योजना के पहले चरण के दौरान जो मामूली फायदा हुआ, उसके पीछे कई कारण थे, जैसे स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां, जिसके कारण चार हजार से ज्यादा बस एवं निजी वाहन सड़कों पर नहीं आए।
सम-विषम योजना को लाने के पीछे दिल्ली सरकार का इरादा अच्छा था, जो सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए सर्वे में भी दिखा। लेकिन किसी भी योजना की सफलता काफी हद तक उसकी व्यापक रूपरेखा और मूल्यांकन पर निर्भर करती है। सम-विषम योजना का दूसरा चरण लागू करने से पहले सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं किया गया, जिसके कारण इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। आगे यह भी देखा गया कि इस योजना के लागू होने के दस दिन बाद भी यात्रा समय में कमी, ट्रैफिक जाम से निजात एवं वायु प्रदूषण के स्तर में गिरावट नहीं देखी गई।
दिल्ली की सरकार को इस तथ्य को समझना चाहिए कि इस तरह की योजनाएं थोड़े-थोड़े समय पर वायु प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के उपाय हैं, जिन्हें गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति में ही लागू किया जाना चाहिए। ऐसे उपायों को नियमित रूप से तब तक लागू नहीं करना चाहिए, जब तक कि प्रभावी और सुविधायुक्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो। इसके अलावा, कुछ समय बाद लोग अपने आराम और सुविधा के लिए पुरानी कारें या दुपहिया वाहन जैसे वैकल्पिक साधन खरीदकर ऐसे हस्तक्षेप को अपने अनुकूल बना लेते हैं। सम-विषम जैसे उपायों को अपनाते वक्त इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अलावा सम-विषम योजना के दायरे में सिर्फ कारों को रखा गया, दो पहिया वाहनों को नहीं, जबकि कारों की तुलना में वे ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। इसलिए आंशिक उपाय प्रदूषण के सीमित स्रोतों को ही लक्ष्य बनाते हैं, जबकि प्रदूषण के सभी स्रोतों-दो पहिया और चार पहिया वाहनों, पर इस योजना को लागू किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, इस योजना का वास्तविक लाभ पाने के लिए यह जरूरी है कि दिल्ली सरकार एक व्यापक रूपरेखा बनाए, जिसमें वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों-बायोमास और कचरा जलाना, निर्माण कार्य और सड़कों की धूल, उत्सर्जन वाले हर प्रकार के वाहन, आदि को लेकर नीति हो।
टेरी विश्वविद्यालय में प्राकृतिक संसाधन विभाग के अध्यक्ष