फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबी मुक्त भारत की ओर

Thu, 26 May 2016 03:24 PM IST
राजीव चंद्रशेखर
विज्ञापन
राजीव चंद्रशेखर
विज्ञापन
अब से चौबीस महीने पहले देश ने राजग सरकार को शासन का जनादेश दिया था। यह एक ऐसा चुनाव था, जिसने देश की मुख्यधारा के विमर्श को स्थायी तौर पर बदल दिया था। नरेंद्र मोदी सरकार को बदलाव के लिए जनादेश मिला था, जिसमें मुख्य रूप से सुशासन प्रदान करना, आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना और सरकारी भ्रष्टाचार पर रोक लगाना था।
विज्ञापन


राजग सरकार की सबसे कठिन चुनौती दशकों से प्रचलित भ्रष्टाचार, लापरवाही और यूपीए शासन की विनाशकारी आर्थिक नीति के कारण अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई करना था। इस सरकार ने बदहाल अर्थव्यवस्था की बहाली, निवेशकों का भरोसा जीतने और जर्जर बैंकिंग व्यवस्था को पुनर्जीवित करने जैसे मुद्दों का सामना किया। यह सब कुछ इसे जबर्दस्त वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अशांति के माहौल में करना था। इन तमाम क्षेत्रों में सरकार ने बेहतर काम किया है। यूपीए द्वारा अर्थव्यवस्था और शासन के क्षेत्र में हुई क्षति की लगभग पूरी तरह से इसने मरम्मत की है।

मोदी सरकार के कामकाज के विश्लेषण और आलोचनाओं के बीच एक चीज तो बिल्कुल स्पष्ट है कि इस दौरान एक नई कार्यसंस्कृति और सरकार की नैतिकता सुर्खियों में रही है। इस सरकार ने एक आक्रामक और कठिन कार्यसंस्कृति को अपनाया, जो धीरे-धीरे ही सही, लेकिन निश्चित रूप से छह दशक पुरानी भ्रष्टाचार की संस्कृति और सरकारी उदासीनता को खत्म कर रही है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी के कटु आलोचक भी इस बदलाव को स्वीकार करेंगे।
विज्ञापन


पिछले दो वर्षों में अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण हुआ है और उसे गड्ढे से निकाला गया है। मोदी सरकार यूपीए की दशकों पुरानी विरासती समस्याओं को साफ करने की प्रक्रिया में भी है, जिसने अर्थव्यवस्था में क्रोनी कैपिटलिज्म, विफल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राजनीतिक एवं सरकारी भ्रष्टाचार, काला धन, रिसावयुक्त अप्रभावी सरकारी खर्च और सरकारी फिजूलखर्ची की अनियंत्रित संस्कृति को जन्म दिया। इसका पता ठोस सबूतों से चलता है-राजग सरकार के कार्यकाल में देश की जीडीपी वर्ष 2013-14 के 6.6 फीसदी से बढ़कर 7.6 फीसदी पर पहुंच गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर 5.4 फीसदी पर आ गया है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 350 अरब डॉलर के ऊच्च स्तर पर है। वर्ष 2015 की शुरुआत से चालू खाते के घाटे में चार अरब डॉलर की कमी आई है। सबसे अहम बात है कि रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2016 के प्रारंभ में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। साफ है कि राजग सरकार की प्रमुख पहल 'मेक इन इंडिया' को सफलता मिली है। राजग सरकार ने यूपीए के विशालकाय और दूरदर्शी कार्यक्रमों को नियंत्रित करने से खुद को अलग रखा है। बल्कि इसने सरकारी खर्च की कुशलता, निष्पादन, कुशल वितरण और उन समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे देश में बहुत से लोग जूझ रहे हैं। सरकार ने प्रभावी ढंग से जनधन योजना, आधार कार्ड और मोबाइल (जैम) का इस्तेमाल करके सब्सिडी के कुशल वितरण और रिसाव के खात्मे को सुनिश्चित किया है। इससे सार्वजनिक खर्च में भारी सुधार हुआ और दशकों से जारी भ्रष्टाचार से निपटा गया।

पहली बार किसी सरकार द्वारा शुरू किया गया मुद्रा बैंक कार्यक्रम अनियोजित क्षेत्र को संबोधित करता है, जिसके तहत दशकों से पूंजी से वंचित करोड़ों छोटे व्यवसायी को अपना उद्यम चलाने के लिए कर्ज मिल रहा है। यह असंगठित क्षेत्र को संगठित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है, जो करोड़ों भारतीयों को रोजगार देता है।

यह सरकार यूपीए शासन के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा लापरवाह और भ्रष्ट तरीके से दिए गए कर्ज की समस्या से निपटने के लिए एक दीर्घकालीन समाधान का रोडमैप लाने में भी सफल रही है। पहली बार इन बैंकों को सार्वजनिक धन एवं संपत्ति माना जा रहा है, जिसे संरक्षण और जवाबदेही की जरूरत है। वित्तीय विनियमन क्षेत्र में भी कुछ प्रगति हुई है-दिवालियापन से संबंधित कानून अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए प्रभावी आवंटन एवं पूंजी की उपलब्धता में मददगार होगा।

राज्यसभा में विपक्ष के लगातार विरोध के बावजूद सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने में सक्षम रही है। सरकार ने आधार विधेयक को पारित कराके यूपीए की एक खराब परियोजना को सब्सिडी वितरण के उपयोगी मंच में बदल दिया। उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के मद्देनजर राजग सरकार ने रियल एस्टेट विधेयक भी पारित कराया, जो किसी भी सरकार द्वारा पारित सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता हितैषी कानून है। यह कानून उपभोक्ता अधिकारों की स्थापना और बिल्डरों के दायित्व को समाहित करते हुए बुरी तरह से असंगठित रियल एस्टेट क्षेत्र का बचाव करता है।

अगले तीन वर्षों में नियामक सुधार की तरफ सरकार को ध्यान केंद्रित करना होगा। अर्थव्यवस्था में एक स्वतंत्र, तकनीकी रूप से सुसज्जित और ताकतवर नियामक को कम करके नहीं आंका जा सकता, जो व्यापक रूप से तकनीकी प्रभावों और वित्तीय बाजारों पर निर्भर है और जो विस्तृत उपभोक्ता आधार की रक्षा करना चाहता है।

राजग ने पिछले दो वर्षों में निश्चित रूप से भारतीय शासन की धारणा को नया आकार दिया है। इसने भारत को एक ऐसे रास्ते पर आगे बढ़ाया है, जिसमें वर्षों तक दस फीसदी की स्थायी विकास की उम्मीद है। ऐसा विकास भारत के लिए जरूरी है, जो सभी नागरिकों के समान विकास और अवसरों को सुनिश्चित करे और राष्ट्र को गरीबी से मुक्त करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें