हालांकि, पूरे विश्व में सकल घरेलू उत्पाद के मामले में भारत पांचवें स्थान पर आ गया है और अब उससे आगे केवल अमेरिका, चीन, जापान एवं जर्मनी जैसे देश हैं। परंतु, अधिक जनसंख्या होने के कारण भारत में प्रति व्यक्ति आय अन्य कई देशों की तुलना में बहुत कम है। प्रत्येक भारतीय की औसत आय 2,200 डॉलर प्रति वर्ष है, जबकि अमेरिका में प्रति व्यक्ति औसत आय 70,000 डॉलर प्रति वर्ष है और चीन की जनसंख्या भारत से भी अधिक होने के बावजूद प्रत्येक चीनी नागरिक की औसत आय 12,000 डॉलर प्रति वर्ष है। इस प्रकार देश में प्रति व्यक्ति औसत आय बढ़ाने का प्रयास किया जाना अब बहुत जरूरी है, जिसमें भारत की युवा शक्ति को अपना योगदान देना आवश्यक हो गया है।
आज किसी भी देश के लिए जनसंख्या का अधिक होना और उसमें भी युवा जनसंख्या की भागीदारी ज्यादा होना, उस देश के लिए बहुत लाभकारी स्थिति बन जाती है। वह भी तब, जब विशेष रूप से कई विकसित देशों यथा, जापान, जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, चीन, कनाडा आदि में जन्म दर बहुत कम हो चुकी हो एवं इन देशों में प्रौढ़ नागरिकों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही हो एवं युवा जनसंख्या का अभाव महसूस किया जा रहा हो। इस प्रकार भारत युवा जनसंख्या की दृष्टि से बहुत ही लाभप्रद स्थिति में आ गया है।
भारत की कुल 140 करोड़ जनसंख्या में से 50 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 25 वर्ष से कम है और 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। सबसे अधिक युवा, अर्थात 18-35 वर्ष के आयु वर्ग में 60 करोड़ भारतीय नागरिक आते हैं। भारतीयों की औसत आयु मात्र 29 वर्ष है, जबकि चीन के नागरिकों की औसत आयु 37 वर्ष एवं जापान के नागरिकों की औसत आयु 48 वर्ष है। इसीलिए भारत को एक युवा देश कहा जा रहा है और पूरे विश्व की निगाहें आज इस पर टिकी हुई हैं। अब तो यह स्थिति दिखाई देने लगी है कि यदि भारत आर्थिक प्रगति करेगा, तो पूरा विश्व ही आर्थिक प्रगति करता हुआ दिखाई देगा।
आज भारत में साक्षरता दर 80 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है, जो कि एक बहुत अच्छी दर कही जा सकती है। हालांकि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में शिक्षा का स्तर अलग-अलग दिखाई देता है। इसलिए, भारत के युवाओं में कौशल के अभाव में देश के आर्थिक विकास में इनका योगदान संतोषप्रद स्तर तक नहीं हो पा रहा है। कौशल के अभाव में इस वर्ग की उत्पादकता भी तुलनात्मक रूप से कम दिखाई देती है। भारत के युवाओं में शिक्षा के स्तर को और अधिक सुधारने के लिए हाल ही में भारत में कई नए उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित किए गए हैं।
भारत में शिक्षित युवा कई विकसित देशों में पहुंचकर वहां के प्रौद्योगिकी, मेडिकल एवं प्रबंध के क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं एवं इन देशों के कई निजी संस्थानों को तो एक तरह से भारतीय ही चला रहे हैं। आज खाड़ी के कई देशों के साथ ही जापान के अस्पतालों तक में भारतीय नर्सों की बहुत अधिक मांग है। केंद्र सरकार की नीतियों के चलते ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और खाड़ी के देश आज भारतीय मूल के नागरिकों पर विश्वास करते हुए उन्हें राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक आदि क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि देश के युवाओं को आगे आकर केंद्र और राज्यों की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर अपने कौशल को विकसित कर देश के विकास में अपने योगदान को बढ़ाना चाहिए, ताकि भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाया जा सके।