व्हेन इट्स नेवर अबाउट यू की लेखिका और चिकित्सक इलीन कोहेन कहती हैं कि अपनी इच्छाओं और जरूरतों को मारकर लोगों को खुश करने की प्रवृत्ति के कई कारण होते हैं। कई लोगों की यह आदत बचपन से ही बन जाती है, जो वयस्क होने तक चलती रहती है, जबकि कुछ लोग सामाजिक कमी, चिंता या विवाद के डर से इन आदतों को जारी रखते हैं। कंसीडर दिस : रिफ्लेक्शंस फॉर फाइंडिंग पीस के लेखक और चिकित्सक नेड्रा ग्लोवर तव्वाब कहते हैं, ‘एक समय बाद आप अपनी इस आदत से ऊब कर झल्लाने लगते हैं।’ डॉ. कोहेन ने कहा, ‘यदि आप दूसरों को प्राथमिकता देने के आदी हैं, तो अपने लिए खड़े होने में घबराहट हो सकती है, जब आप पहली बार अपनी बात कहना शुरू करेंगे, तो कुछ आपत्तियां भी हो सकती हैं।’ इसलिए मैंने विशेषज्ञों से उन वजहों का पता किया, जो लोगों को प्रसन्न करने की इच्छा रखने के लिए प्रेरित करती हैं और उनसे कैसे निपटा जाए?
आने वाली पुस्तक द नेक्स्ट कन्वर्सेशन : आर्ग्यू लेस, टॉक मोर के लेखक जेफरसन फिशर कहते हैं कि आपका नया दृढ़निश्चयी स्वभाव लोगों को हैरान कर सकता है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय से आपके मुंह से ‘हां’ सुना है, तो ‘न’ कहने पर भी वे आपका पीछा आसानी से नहीं छोड़ेंगे। डॉ. तव्वाब कहते हैं कि शुरुआत में इससे थोड़ा धक्का लगेगा और लोग आपकी सीमाओं को नापसंद करेंगे, लेकिन बाद में वे उनका आदर करना सीख जाएंगे। मनोवैज्ञानिक बेंजामिन बर्नस्टीन व अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि दूसरों को बुरा लगेगा या मेरी बात सुनकर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी, ऐसी चिंताओं को त्यागकर अपनी बात खुलकर कहनी चाहिए। डॉ. फिशर ने कहा, ‘सभी रिश्तों में थोड़े से लेन-देन की जरूरत होती है, लेकिन अगर किसी को अधिक पसंद करने से आप खुद को कम पसंद करने लगते हैं, तो यह ठीक नहीं है।’