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क्या तानाशाह बनेंगे जिनपिंग

Tue, 13 Dec 2016 07:13 PM IST
हो पिन
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हो पिन
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चीन को शी जिनपिंग जैसे एक मजबूत नेता की जरूरत है। देश का कद्दावर मुखिया ही अप्रभावी नौकरशाही को व्यवस्थित कर सकता है और देश को सुधार की राह पर ले जा सकता है। लेकिन अन्य कद्दावर नेताओं से शी जिनपिंग बहुत अलग प्रतीत होते हैं।
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1980 के दशक से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी एक व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन सुनिश्चित करने और माओ-शैली की तानाशाही को रोकने के अघोषित नियम का पालन कर रही है। पार्टी के मुखिया का कार्यकाल दस वर्षों का होता है और अपने कार्यकाल की आधी अवधि के बाद वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मदद से एक उत्तराधिकारी को मनोनीत करता है। शी जिनपिंग को अगले वर्ष पार्टी सम्मेलन में एक उत्तराधिकारी मनोनीत करने की जरूरत होगी।

पहले पार्टी नेता के कार्यकाल के इस समय तक संभावित उत्तराधिकारियों के नाम पहले ही उभरकर सामने आ जाते थे। लेकिन इस बार ऐसे किसी नाम पर चर्चा नहीं हो रही है और न ही किसी का नाम सामने आया है। संभव है कि शी जिनपिंग अपना उत्तराधिकारी चुनने में ज्यादा समय लें, लेकिन इस बात के संकेत हैं कि वे इस रिवाज को तोड़ना चाहते हैं और दस वर्ष के कार्यकाल के बाद भी पार्टी प्रमुख बने रहेंगे।
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हाल के महीनों में शी जिनपिंग ने सरकार और पार्टी में अपने कई सहयोगियों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने सेना को पुनर्व्यवस्थित किया है और जनरलों के लिए अवज्ञा करना और तख्तापलट करना मुश्किल बना दिया है। न तो माओ जेदांग और न ही देंग शियोपिंग ऐसा नियंत्रण करने में सक्षम थे। आखिर किन वजहों से जिनपिंग मानते हैं कि वह सत्ता पर पकड़ बनाए रख सकते ?

पहली वजह तो यह है कि पार्टी चार्टर अपने शीर्ष नेता के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं करता है। दस वर्षों की सीमा एक अलिखित रिवाज की तरह है। इसके अलावा शी जिनपिंग को भारी जन समर्थन प्राप्त है। वर्ष 2012 में जबसे वह सत्ता में हैं, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकप्रिय अभियान चलाकर पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। यह चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना (1949) के बाद से सबसे सख्त अभियान है, जिसमें 190 वरिष्ठ अधिकारी और हजारों भ्रष्ट स्थानीय कार्यकारी दंडित किए गए हैं। उन्होंने राष्ट्रहित में क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को भी नया आकार दिया है। दक्षिण चीन सागर पर उनके सख्त रुख को देश में भारी समर्थन मिला।

उनका कोई दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी नहीं है। उन्होंने बेवफा पार्टी नेताओं और सैन्य नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया और अपने साथी पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्यों को कमजोर कर दिया। और पार्टी के वरिष्ठ नेता इतने बूढ़े और कमजोर हैं कि उनसे उन्हें कोई परेशानी ही नहीं है। लेकिन चीन के व्यवसायियों और राजनीतिक अभिजात्यों के साथ किए सैकड़ों इंटरव्यू के आधार पर कह सकता हूं कि शी जिनपिंग अजेय नहीं हैं। नेतृत्व परिवर्तन के पार्टी के रिवाज को तोड़कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश राजनीतिक रूप से जोखिमपूर्ण और आत्मघाती हो सकती है। सत्ता हड़पने की कोशिश का पार्टी के भीतर तीखा विद्रोह हो सकता है। भले ही चीन के लोग एक मजबूत नेता का स्वागत करते हों, लेकिन वे एक व्यक्ति के लंबे शासन को  बर्दाश्त नहीं कर सकते। और अब लोगों को पहले की तरह आसानी से इशारों पर नहीं नचाया जा सकता। सरकार को इंटरनेट की सामग्रियों पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा है।

लोगों में शी जिनपिंग की साख इसी आधार पर बनी है कि वह कैसे आर्थिक विकास करते हैं। अब तक वह इसमें विफल रहे हैं। चीन का आर्थिक विकास लगातार घटता जा रहा है और अर्थव्यवस्था को संभालने में उनकी क्षमता पर लोगों का भरोसा घटता जा रहा है।
लेकिन अगर शी जिनपिंग अपने पूर्ववर्तियों की तरह कार्यकाल के अंत में सत्ता का त्याग कर देते हैं, तो उनकी कई कठोर एवं विवादस्पद नीतियों की, जिसमें भ्रष्टाचार विरोधी अभियान भी शामिल है, पार्टी के अभिजात्य वर्ग द्वारा जांच हो सकती है। और जिस देश में शी ने निष्पक्ष न्याय की कीमत पर पार्टी हित के पक्ष में कानून बनाया है, वहां सत्ता से हटने के बाद उनका अपना जीवन, परिवार और सहयोगी खतरे में पड़ सकते हंै।

शी जिनपिंग के लिए सत्ता विस्तार का सबसे बेहतर विकल्प यह है कि वह कम्युनिस्ट पार्टी की शासन प्रणाली को व्यवस्थित कर दें। पिछले कुछ वर्षों से सांविधानिक विशेषज्ञ इसका गुप्त अध्ययन करने के लिए कह रहे हैं कि कैसे वैध तरीके से शी के शासन का विस्तार हो सकता है। कुछ विद्वानों का सुझाव है कि चीन के लिए चुनावी राष्ट्रपति प्रणाली को अपनाया जा सकता है।

यह दूर की कौड़ी लग सकता है, पर ऐसी प्रणाली शी जिनपिंग को सत्ता में बने रहने के लिए वैधता और जन समर्थन दिला सकती है। चुनाव की वैधता के बिना उन्हें 2022 में सत्ता से हटना होगा या नीचतापूर्वक पार्टी नियमों की अनदेखी करते हुए खुद को तानाशाह बनाना होगा।

चुनावी प्रणाली अपनाने के लिए शी जिनपिंग अपने कार्यकाल के अंत में 2022 में चीन के संविधान को बदल सकते हैं और राष्ट्रपति के पद को मजबूत बना सकते हैं। एक बार जब राष्ट्रपति को सरकार और सेना पर नियंत्रण का अधिकार मिल गया, तो शी जिपिंग पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति को खत्म कर सकते हैं, अपने पद को पार्टी महासचिव नाम दे सकते हैं और नए सशक्त राष्ट्रपति पद के दौड़ में शामिल हो सकते हैं। पार्टी केंद्रीय समिति उम्मीदवारों का मनोनय कर सकती है और सांसदों को दौड़ में शामिल लोगों में से राष्ट्रपति चुनने का अधिकार दिया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में भी सांसद राष्ट्रपति चुन सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपति के पास अधिकार नहीं होता। आदर्श रूप में ये परिवर्तन चीन की शीर्ष विधायिका नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सदस्यों के प्रत्यक्ष चुनाव का रास्ता प्रशस्त करेगी। पार्टी के भीतर लोकप्रियता और ताकत को देखते हुए कहा जा सकता है कि शी जिपिंग चीन के नेता के रूप में ज्यादा समय पा सकते हैं।
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