कवि कभी रिटायर नहीं होता। वह जब संभावनाएं देखता है, तभी आत्मा को प्रमोशन दे देता है। कवि का विचार है कि यदि वह कॉलेज में पढ़ाता है, तो उसे पढ़ाने से रिटायर नहीं किया जाना चाहिए। वजह यह है कि वह पढ़ाता नहीं, कविताई करता है। आधी तनख्वाह करके घर जाने पर भी वह कवि बना रहेगा। उसे पूरी तनख्वाह दो, वह पूरी कविताई पर उतरा हुआ है। देश को कविता मिलेगी, उसे तनख्वाह मिलेगी।
'आपने देखा, मनमोहन सिंह तक रिटायर होने का ऐलान जैसा कुछ कर गए। क्या आपको नहीं लगता कि अंतत: एक दिन रिटायरमेंट आता ही है?' मैंने कवि को वह तस्वीर दिखाई जिसमें प्रधानमंत्री अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद 'एक्जिट' वाले दरवाजे से जाते दिखाई दे रहे थे।
उन्होंने त्यौरियां चढ़ाते हुए कहा, 'लीडर कभी रिटायर होते हैं?'
'जरूरी नहीं कि हर प्रधानमंत्री आपके हिसाब का लीडर हो। पर यह मानने में क्या हर्ज है कि मनमोहन सिंह भी लीडर है, फिर भी रिटायर हो रहे हैं।'
'वे तो संयोगवश देशसेवा में आ गए वर्ना विदेश से लेकर देश तक खासे अफसर-अर्थशास्त्री रहे हैं। अफसर एक दिन रिटायर होते ही हैं। यह लीडर नहीं अर्थशास्त्री का अफसर बोल रहा होगा।'
'पर अर्थशास्त्री तो शायद रिटायर नहीं होते?'
'अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र की छाती पर बैठा-बैठा राजनीति शास्त्र पढ़ता है, तब देश चलता है। इसे कवि से समझो, लीडर से समझो, बाकी को छोड़ दो। बाकी इतिहास कहेगा।'
'मान लीजिए एक अफसर रिटायर हुआ....।'
'घर पर घंटियां बजनी बंद हो जाएंगी। जूतों और पेड़ों की दुकान के वाऊचर आना बंद हो जाएंगे। वह मर जाएगा। पर, इतिहास में नहीं जाएगा।'
'ऐसा नहीं है। अफसर भी शान से रिटायर होते हैं।'
'हां, कुछ हैं। उन्हें मल्टीनेशनल सलाहकार बना लेती हैं। वे शान से रिटायर नहीं होते, रिटायर होने के बाद शान की दुकान में चले जाते हैं। कुछ हैं जो एनजीओ बनाते हैं और लंबे-लंबे लेख भी लिखते हैं। पर इतिहास उन पर कुछ नहीं कहेगा।' कवि ने बांहें चढ़ा लीं।
'आपको किसी ने सलाहकार बनाना चाहा?'
'मैं कहता हूं, देश को दो ही लोग चाहिए - कवि और लीडर। जिस लीडर को लीडरों से अलग दिखने की आदत होती है, वह भी एक कवि साथ रखता है। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कवि सलाहकार नहीं हो सकता, पर यह कहूंगा कि वह सलाहकार से ऊपर की चीज हो सकता है।'
'मसलन, वह कवि और लीडर एक साथ हो सकता है। यानी कवि के भीतर लीडर और लीडर के भीतर कवि या कहें कि कवियाता हुआ लीडर या लीडरियाता हुआ कवि?'
'आप भाषा दोष से पीड़ित हैं। आप राजनीतिक दृष्टि शून्यता के शिखर हैं। आप नहीं जानते कि कविता जनपथ की अनंत यात्रा का गान है। कवि रिटायर नहीं होता, वह इतिहास में जाता है।'
'प्रधानमंत्री ने भी तो यही कहा कि पहली बार के भ्रष्टाचार की सफाई दूसरी बार के जीतने से हो गई। अब जो किया है, उसका उत्तर इतिहास देगा। मगर कविताएं तो शायद तुरंत उत्तर देती हैं।'
'आप इतिहास को नहीं जानते। इतिहास बड़ी महत्वपूर्ण चीज होती है। जब वर्तमान का पता न हो और भविष्य का भरोसा न हो तो वह इतिहास ही है जो साथ रहता है। मैं कविता में इतिहास रचता हूं। लीडर इतिहास में कविता के साथ जाते हैं तो उज्ज्वल और निर्भय हो जाते हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि इस ऐतिहासिक वर्तमान का भविष्य सिर्फ कविता की लीडरी है।'
'आप काफी जटिल बिम्ब उठा रहे हैं। आम आदमी को ये समझ नहीं आ रहे हैं। क्या आप कांग्रेस की कविता नहीं हुए जा रहे हैं?'
'आजादी के पहले और आजादी के बाद, सपनों और कर्मों में, सरकार और व्यापार में, मैंने राजकाज को कभी कविता से अलग नहीं समझा। मैं रचता हूं, जीवन बनता है। हाईकमान रचता है, लीडर बनता है। दोनों मिलते हैं तो गणतंत्र बनता है।'
कवि बोलते-बोलते थक गया था। ऐसा लगा जैसे कोलगेट और इंडिया गेट के बीच जनपथ के रास्ते पर भटका हुआ आदमी हो।
लेकिन वह आदमी कैसे हो सकता है? कवि और लीडर भले ही रिटायर होते हों, आदमी कभी रिटायर नहीं होता। आदमी रिटायर हुआ तो आदमियत रिटायर हो जाएगी। कौन चाहेगा कि लीडर और कवि की कीमत पर आदमी जाए?
कवि थका हुआ है। 2014 की सब्सिडी वाली मिनरल वाटर की बोतल खोल रहा है। उसका हलक तर हो तो ये क्षण इतिहास में जाएं और अगले चुनाव का कविता-पोस्टर छाप कर लाएं।
और अंत में
आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दस कमरों का मकान फाइनल किया। इस पर गणित की किताब से उठाया गया एक सवाल - 'शीला दीक्षित के लॉन की चौड़ाई यदि 'एक्स' थी तो उनके मकान का क्षेत्रफल कितना हुआ?'
जवाब - 'जितना आम आदमी पार्टी के कुल विधायकों के साथ कांग्रेस के कुल विधायकों का नंबर है।'
- एक पाठक ने देहरादून से भेजा