कानून बनाना लोकसभा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। इसी से जनहित की बेहतर नीतियां लागू होती हैं और जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका के साथ न्याय कर पाते हैं। इस लिहाज से वर्ष 2014 में 18 मई को गठित 16वीं लोकसभा के बीते तीन साल काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। इन तीन वर्षों में लोकसभा में 144 विधेयक पेश हुए, जबकि 134 विधेयक पारित हुए। इनमें सबसे ज्यादा 24 विधेयक 2015 के बजट सत्र में पारित हुए थे। पारित हुए कई विधेयक व्यापक प्रभाव डालते हैं। संसद के बीते बजट सत्र में वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े तीन विधेयकों पर मुहर लगी। जीएसटी अब 20 से ज्यादा अप्रत्यक्ष करों की जगह लेगा। उत्पादों और सेवाओं को बेहतर तरीके से जनता तक पहुंचाने के मकसद से लाए गए जीएसटी के लागू होने के बाद कई उत्पादों के दाम घटने की उम्मीद है, तो कुछ के बढ़ने की भी। कई राज्यों में इससे जुड़े विधेयक पर मुहर लग चुकी है। सरकार का इरादा एक जुलाई से इसे देश भर में लागू करने का है।
काले धन के खिलाफ कानूनी लड़ाई चुनावी मुद्दा था और विगत तीन वर्षों में सरकार ने इससे जुड़े कई विधेयक पारित किए। 11 मई, 2015 को लोकसभा में पारित हुआ विदेशों में जमा अघोषित संपति की घोषणा से जुड़ा विधेयक इनमें प्रमुख रहा। इसमें दोषियों के खिलाफ 10 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान है। बेनामी लेन-देन निषेध संशोधन विधेयक, 2015 भी इसी तरह का एक और महत्वपूर्ण विधेयक रहा। मई, 2015 में पेश हुए इस विधेयक पर 27 जुलाई, 2016 को लोकसभा की मुहर लगी। इसमें बेनामी लेन-देन की परिभाषा और दोषियों के खिलाफ सजा का प्रावधान है।
जिंदगियां बचाने के मकसद से 10 अप्रैल, 2017 को पारित हुआ मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 1988 के कानून में संशोधन करता है। अब राष्ट्रीय परिवहन नीति और सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के लिए कैशलेस उपचार की व्यवस्था होगी। दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को कानूनी कार्रवाई में रियायत मिल सकेगी। भारत जैसे देश में इस विधेयक के खासे मायने हैं, जहां हर साल सड़क हादसों में पांच लाख लोग घायल होते हैं, जबकि डेढ़ लाख जानें जाती हैं। नौ वर्षों के इंतजार के बाद रियल एस्टेट से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक पर भी लोकसभा में मुहर लगी।
बीते साल 15 मार्च को लोकसभा में पारित हुआ यह विधेयक एक मई से लागू हो चुका है। इस कानून से रियल एस्टेट ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा की उम्मीद बढ़ी है। समय पर मकान न देने पर बिल्डरों को अब ब्याज देना होगा। तेजी से बढ़ते शहरी तबके के लिए इस विधेयक का पारित होना वक्त की जरूरत था। इसी दौरान सुशासन के मद्देनजर गैरजरूरी करीब 1,800 कानूनों में से 1,200 कानूनों को खत्म किया जा चुका है। इस बीच मातृत्व अवकाश, बाल अधिकार समेत आर्थिक सुधार संबंधी कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित हुए हैं। हालांकि विधायी मोर्चे पर इन तीन वर्षों को एक के बाद एक अध्यादेश लाने, विरोध के बाद भूमि अधिग्रहण विधेयक को ठंडे बस्ते में डालने और विपक्ष द्वारा लंबे समय तक जीएसटी विधेयक को लटकाए रखने के लिए भी याद किया जाएगा।
14वीं लोकसभा में इस अवधि तक 164 और 15वीं लोक सभा में 137 विधेयक पारित हुए थे, जबकि 16वीं में 134 विधेयक! पारित हुए विधेयकों की संख्या भले कम रही हो, पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था विधायिका ने इन तीन वर्षो में काफी कुछ बेहतर किया है।
-लेखक लोकसभा टीवी में एंकर हैं।