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आधी आबादी: प्रतिमाओं में भी महिलाओं की उपेक्षा, दिल्ली से लेकर देशभर का यही हाल

विवेक शुक्ला
Updated Wed, 08 Mar 2023 06:27 AM IST

सार

देश के विभिन्न शहरों में पुरुष नेताओं, समाज सेवियों, शहीदों की प्रतिमाएं खूब दिखती हैं, लेकिन महिलाओं की प्रतिमाएं गिनी-चुनी ही हैं।
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रानी लक्ष्मी बाई - फोटो : अमर उजाला


महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 को दांडी यात्रा शुरू की थी, जिसकी याद में दिल्ली के सरदार पटेल मार्ग-मदर टेरेसा क्रिसेंट पर महान मूर्तिकार देवीप्रसाद राय चौधरी की अप्रतिम कृति 'ग्यारह मूर्ति' स्थापित है। ग्यारह मूर्ति में बापू के साथ मातंगीनी हजरा और सरोजनी नायडू को भी दर्शाया गया है। मातंगीनी हजरा महान क्रांतिकारी थीं। गोरी सरकार की पुलिस ने 29 सितंबर, 1942 को पूर्वी मिदनापुर जिले में उन्हें गोली मार दी थी। सरोजनी नायडू गांधी जी के साथ नोआखली में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी गई थीं। वह उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल भी बनीं।


इस बीच, संसद भवन के गेट नंबर पांच पर इंदिरा गांधी की 16 फीट ऊंची कांस्य की प्रतिमा 27 जनवरी, 1996 को स्थापित की गई थी। इसे महान मूर्तिकार राम सुतार ने तैयार किया था। संसद भवन में ही कर्नाटक के कित्तूर की रानी चेन्नम्मा की भी प्रतिमा मिलती है। रानी चेन्नम्मा ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ अपनी सेना बनाकर लड़ी थीं। उन्हें दक्षिण भारत की लक्ष्मी बाई कहा जाता है। उनकी मूरत 11 सितंबर, 2007 को संसद भवन में स्थापित हुई थी।


इन्हें छोड़कर देश के अधिकतर शहरों में महान महिलाओं की मूरतें नहीं मिलती हैं। राम सुतार को भी हैरानी हुई कि देश में आधी दुनिया की शख्सियतों की मूर्तियां क्यों नहीं बनीं और स्थापित हुईं। उत्तर प्रदेश में मायावती ने कई शहरों में अपनी मूरतें लगवाईं, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ। वैसे मदर टेरेसा की एक मूरत कोलकाता के आर्क बिशप हाउस में है। हो सकता है कि किसी इमारत या संस्थान के परिसर में किसी अन्य मशहूर महिला की मूरत स्थापित हो, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर ये कभी-कभार ही देखने को मिलती हैं।


आपको राजधानी के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में ‘माता जी’ की आदमकद मूर्ति मिलेगी। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के भीतर एक महिला की बड़ी-सी प्रतिमा स्थापित है। इसे देखकर लगता है कि ये यहां की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही हैं। इस मूरत को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज बिरादरी माताजी कहती है। दरअसल यह लेडी हार्डिंग की प्रतिमा है। उन्हीं के प्रयासों से सात फरवरी, 1916 को यह मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ था, हालांकि इसकी नींव 17 मार्च, 1914 को ही रखी गई थी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ साल पहले बनारस में काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करते हुए इंदौर की देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की थी। अहिल्याबाई की प्रतिमा संसद भवन में वर्ष 2006 में स्थापित हुई थी। दिल्ली में कनॉट प्लेस के पास पंचकुंइयां रोड में एक सड़क का नाम अहिल्याबाई होलकर मार्ग रखा गया है। देवी अहिल्याबाई ने अपने शासनकाल में अनेक मंदिरों व धर्मशालाओं का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि वह सन 1780 में कुरुक्षेत्र तीर्थयात्रा के दौरान राजधानी दिल्ली भी आई थीं।


इसके अलावा आप राजधानी दिल्ली में रिजर्व बैंक बिल्डिंग के बाहर यक्ष-यक्षी की मूरतें देखेंगे। इन्हें रामकिंकर बैज ने बनाया था। किंकर आधुनिक भारतीय मूर्ति कला के जनक थे। उन्होंने बड़े ही मन से इन्हें तैयार किया था। इन प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए पत्थर लेने की खातिर उन्होंने कई हफ्ते हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ नाम के स्थान की खाक छानी थी। 1970 में लगी यक्ष-यक्षी की प्रतिमा को अब आधी सदी हो रही है।

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