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नैतिकता के दायरे में

नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Fri, 16 Nov 2018 07:22 PM IST
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बिन्नी बंसल

वैश्विक रिटेल कंपनी वालमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट में एक बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के कुछ महीनों बाद ही फ्लिपकार्ट के संस्थापक बिन्नी बंसल को अचानक और अप्रत्याशित रूप से इस हफ्ते बाहर जाना पड़ा। वर्षों से फ्लिपकार्ट भारतीय स्टार्ट-अप परिदृश्य का प्रतीक रही है, खासकर इसलिए, क्योंकि आकार और क्षमता के स्तर पर यह दुनिया की कुछ बड़ी कंपनियों के समतुल्य है। इस लिहाज से बंसल के बाहर निकलने से कंपनी के स्वामित्व या नई इकाई की संरचना में कोई बदलाव नहीं होने वाला है, लेकिन एक शिकायत के आधार पर, जिसमें उन पर व्यक्तिगत दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया गया है, उनके चरित्र पर धब्बा जरूर लगा है। इस घटनाक्रम ने फ्लिपकार्ट के कर्मचारियों, प्रशंसकों सहित उन तमाम स्टार्ट-अप कंपनियों को चौंका दिया, जो फ्लिपकार्ट से प्रेरणा लेती थीं।



वालमार्ट की स्वामित्व वाली कंपनी ने पश्चिम की अपनी ज्यादातर समकक्ष कंपनियों की तरह एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि कंपनी की जांच में बिन्नी बंसल के खिलाफ शिकायतकर्ता के दावे की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला। पर यह भी कहा गया कि बंसल ने कंपनी के अधिग्रहण के समय खुद पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं दी थी। अपनी तरफ से बंसल ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि उनके बीच सहमति के आधार पर रिश्ता था और कि इस प्रकरण ने उन्हें परेशान किया है।


कंपनी ने सीईओ के पद से उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। यह अकेला मामला नहीं है। कुछ महीने पहले टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क को चेयरमैन का पद छोड़ना पड़ा, हालांकि वह सीईओ बने रहे। 2017 में उबर के संस्थापक ट्रैविस क्लानिक ने सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया था। कॉरपोरेट गलियारों में जो मुद्दा उभर रहा है, वह यह कि आपका व्यवहार हर हाल में अच्छा होना चाहिए। सोशल मीडिया की दुनिया में पारदर्शिता बढ़ने से प्रबंधन के लिए खासकर वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले अनुचित कार्यों को ढकना मुश्किल हो रहा है। वास्तव में छोटे स्तर के कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। इस वर्ष अप्रैल में कोटक महिंद्रा बैंक ने कठुआ बलात्कार मामले के पीड़ित पर गंदी टिप्पणी करने के कारण केरल के एक कर्मचारी को निकाल दिया था, क्योंकि वह बलात्कार को उचित ठहरा रहा था।


वर्ष 2010 में प्रतिष्ठित व्यावसायिक विचारक गुरुचरण दास ने अपनी पुस्तक द डिफिकल्टी ऑफ बीइंग गुड में व्यवसाय में नैतिक पहलू की जरूरत और कॉरपोरेट एवं सार्वजनिक जीवन में धर्म पर चर्चा की थी। उस पुस्तक की एक मुख्य बात यह थी कि धार्मिक परंपरा के मुताबिक अच्छे नैतिक विचार अच्छे नैतिक रास्ते की ओर ले जाते हैं, न कि सिर्फ मुनाफा कमाने की ओर। दास ने जोर देकर कहा कि भारत के व्यापक आर्थिक विकास के मद्देनजर नेताओं को समाज को आकार देने वाले अपने सार्वजनिक और निजी निर्णयों में धर्म पर विचार-विमर्श करना चाहिए। यह केवल कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दा या विपरीत लिंग के कर्मचारी के उत्पीड़न का मुद्दा नहीं है।

 

कार्यस्थल ज्यादा खुले बनाए जा रहे हैं और केबिन की दीवारें खत्म हो रही हैं, पदानुक्रम गायब हो रहे हैं और कर्मचारी सच्चाई के साथ खड़े हैं और अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ संगठन के कार्यों पर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं, ऐसे में अब लोगों के लिए कुछ भी छिपाना असंभव हो रहा है। इसके साथ-साथ कॉरपोरेट गवर्नेंस की निगरानी करने वाली संस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रबंधन ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं कर सकता, जो वरिष्ठ प्रबंधकों, प्रमोटरों और बोर्ड में शामिल लोगों के पक्ष में हो। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व प्रमुख ओ पी भट्ट को यस बैंक के अगले सीईओ की तलाश के लिए गठित समिति से और पूर्व नौकरशाह को यस बैंक के गैर कार्यकारी अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। भट्ट को इसलिए हटाया गया, क्योंकि उनका नाम किंगफिशर एयरलाइन्स को बैंक कर्ज देने के मामले में उभरकर आया। जहां तक चावला की बात है, तो उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में नाम आने के कारण हटाया गया। ऐसे और भी बड़े नाम हैं, जो अतीत में उभरे और आगे भी उभरेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को नैतिक होने और अच्छे इंसान होने के बुनियादी मानव लक्षणों को फिर से अपनाना होगा। वर्ष 2013 में इंफोसिस कंपनी ने अपने पूर्व सेल्स प्रमुख फणीश मूर्ति को यौन दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के बाद नौकरी से निकाल दिया था। हालांकि तब इंफोसिस ने मामले को दबा दिया था, जिससे कई प्रश्न अनुत्तरित रह गए। फणीश जब आईगेट में गए, तो उन्हें फिर से इसी तरह के आरोपों का सामना करना पड़ा।

 

हालांकि कार्यस्थल पर कई तरह के भटकाव होते हैं, जिसके कारण अनैतिक और कई मामलों में बहुत गंदा काम करना आसान हो जाता है-इस मामले से यह बात उभरी है कि लोगों को अपने व्यवहार के प्रति सचेत होना चाहिए। अपनी तरफ से संगठन कर्मचारियों को समझाते हैं और यहां तक कि महत्वपूर्ण भूमिका में लगे कर्मचारियों को नैतिकता समझाने और उन्हें प्रभावित करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। ऐसे वक्त में जब संगठनों में नेतृत्व करने वालों की औसत आयु घट रही है, यह उचित है कि संगठन अपने मूल्यों और ब्रांडों की रक्षा करने के लिए उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं, जो अनजाने में किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार करते हैं।

 

अनुचित व्यवहार का मतलब हमेशा यौन शोषण नहीं होता है, वह उस तरह का भी होता है, जिसके कारण ओ पी भट्ट और अशोक चावला को हटाया गया। बिन्नी बंसल का मामला इसलिए प्रकाश में आया, क्योंकि फ्लिपकार्ट का आकार बड़ा है और वह एक भारतीय स्टार्ट-अप है। लेकिन हरेक बिन्नी को समझना चाहिए कि कुछ अन्य कॉरपोरेट प्रबंधक भी हैं, जो या तो उजागर हो रहे हैं या अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। 

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