आज हमें इस बात के पूरे संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप दूसरे कार्यकाल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर पहले से कम संयमित होंगे। अमेरिका के रक्षा मंत्री मनोनीत किए गए पीट हेगसेत ईरान को ‘राक्षस राज’ बता चुके हैं और ट्रंप से आग्रह किया है कि देश की आर्थिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर बमबारी की जाए। हालांकि उनके नामांकित विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नरम रुख अपनाया है। ट्रंप के घनिष्ठ मित्र, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यहूदी राज्य के प्रतिद्वंद्वी ईरान से संघर्ष बढ़ाने पर आमादा हैं। विशेषज्ञों को चिंता है कि ट्रंप की निगरानी में पश्चिम एशिया में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। यानी युद्ध हो सकता है, लेकिन इसके कोई अवश्यंभावी कारण नहीं हैं। ट्रंप खुद को बहुत बड़ा सौदेबाज मानते हैं तथा अप्रत्याशित निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं, और यह सुलह का रूप ले सकता है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो ट्रंप ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हो सकते हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध को खत्म कर देंगे, जिसने न केवल पश्चिम एशिया को अस्थिर कर रखा है, बल्कि 1979 से अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए दुखदायी बना हुआ है।
अब आगामी ट्रंप प्रशासन के पास तीन विकल्प बचे हैं : ईरान को नजर अंदाज करे, उसके साथ युद्ध करे या फिर कूटनीति आजमाए। ईरान को नजर अंदाज करना कभी कारगर साबित नहीं हुआ, क्योंकि तेहरान के क्रांतिकारी और अमेरिका के विरोधी नेता इसे होने नहीं देंगे। हालांकि कूटनीति सबसे बेहतर काम कर सकती है, क्योंकि ट्रंप ने पश्चिम एशिया में शांति का वादा किया है, जो उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है। इसलिए ऐसा हो सकता है कि ट्रंप व उनके सलाहकार पहले इस्राइल और हमास का युद्ध रुकवा दें, फिर इसका श्रेय लेते हुए ईरान के साथ ऐतिहासिक समझौते के लिए कदम बढ़ाएं। लेकिन ईरान तक अमेरिका की पहुंच दूसरे पक्ष की इच्छा से ही संभव होगी।
बीते कुछ महीनों से ईरान चुपके से अमेरिका के लिए नए प्रस्तावों की तलाश में है और सुधारवादी राष्ट्रपति मौसाद पेजशेकियन नए परमाणु सौदे पर बातचीत के लिए तैयार हैं। पिछले महीने जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इस्राइल ईरान के परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना चाहता है, क्या आप भी ईरान को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोच रहे हैं? इस पर ट्रंप ने कहा था, ‘मैं चाहूंगा कि ईरान एक सफल देश बने।’ अभी यह तो नहीं कहा जा सकता कि दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता करेंगे, लेकिन यह सोचना भी मुश्किल है कि बातचीत को अब और ज्यादा टाला जा सकेगा। तमाम सीमित विकल्पों को देखते हुए लगता है कि नए राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस नाटक (युद्ध) के समापन का पर्दा गिरेगा।
©The New York Times 2024