मार्च, 2019 में भारत ने अकुला वर्ग की परमाणु पनडुब्बी (एसएसएन) पट्टे पर लेने के लिए रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह परमाणु पनडुब्बी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी। इससे पहले भारत ने 2012 में मॉस्को से अकुला वर्ग की परमाणु पनडुब्बी एसएसबीएन पट्टे पर ली थी। भारतीय बेड़े में चक्र के नाम से यह पनडुब्बी संभवतः 2025 तक भारतीय नौसेना में नई अकुला पनडुब्बी के चालू होने तक सेवा में रहेगी।
इस समझौते के बाद मॉस्को के साथ नई दिल्ली के रक्षा संबंधों को लेकर वाशिंगटन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। शीतयुद्ध के दौरान भारत और अमेरिका के रिश्ते अच्छे नहीं रहे, लेकिन पिछले पच्चीस वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। वाशिंगटन ने भारत के रक्षा बाजार में महत्वपूर्ण पैठ बनाई है, जो कभी रूसी रक्षा उद्योग के लिए ही विशिष्ट रूप से संरक्षित था। बाजार की प्रतिस्पर्धा के बावजूद वाशिंगटन और मॉस्को के बीच बढ़ते तनाव ने नई दिल्ली को हाशिये पर डाल दिया है।