पिछले दिनों मुझे नरेंद्र मोदी का एक भाषण बहुत याद आता रहा है। वह भाषण उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले नेपाल दौरे पर दिया था। मोदी ने नेपाल के राजनेताओं को उस भाषण में सुझाव दिया कि इस सुंदर, पहाड़ी देश की गुरबत दूर करने के लिए पर्यटन में निवेश करना चाहिए। मोदी का यह सुझाव इस सप्ताह इसलिए याद आया, क्योंकि अभी मैं मध्य प्रदेश से लौटकर आई हूं, जहां मुझे पहली बार सांची जाने का मौका मिला।
वहां सम्राट अशोक के पहले स्तूप को देखने के बाद मुझे लगा कि इस प्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री ने पर्यटन की सुविधाओं में निवेश किया होता, तो हो सकता है कि आने वाला चुनाव शिवराज सिंह आसानी से जीत जाते, बावजूद इसके कि वह पंद्रह साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।
सांची की प्राचीन इमारतें इतनी शानदार हैं कि किसी और देश में ऐसी जगह होती, तो विदेशी पर्यटक लाखों की तादाद में इन इमारतों को देखने आते। जिस दिन मैं सांची गई थी, उस दिन पर्यटक सिर्फ देसी थे और वे भी इतने थोड़े कि न होने के बराबर। कुछ स्तूप के दायरे में पूजा करते दिखे, लेकिन उनका वहां जाने आने का मकसद धार्मिक था, पर्यटन नहीं। पर्यटक वहां क्यों जाएंगे, क्यों जब सांची के आसपास रहने की जगहें नहीं हैं?
भोपाल से आना पड़ता है सड़क के रास्ते और आने में कम से कम दो घंटे लग जाते हैं। बिल्कुल इतनी दूरी पर एक अन्य दिशा में हैं भीमबेटिका की हजारों वर्ष पुरानी गुफाएं। न सांची के रास्ते में पर्यटकों के लिए कोई सुविधा है और न ही भीमबेटिका के रास्ते में। रास्ते में दिखते हैं गरीब, बदसूरत गांव, जो याद दिलाते हैं कि चौहान काबिल मुख्यमंत्री माने जाने के बावजूद इस प्रदेश की गरीबी नहीं दूर कर पाए हैं।
मध्य प्रदेश में प्राचीन इमारतों के अलावा सुंदर, घने जंगल हैं, पुराने महल हैं, म्यूजियम हैं, जहां प्राचीन मूर्तियों के अलावा देखने को मिलते हैं इस प्रदेश के आदिवासियों की कला और कृति। पर्यटकों को आकर्षित करने की चीजों के मामले में मध्य प्रदेश इतना धनी है कि समझ में नहीं आता कि अपने लंबे कार्यकाल में चौहान ने पर्यटन को आर्थिक साधन के रूप में क्यों नहीं देखा।
भाजपा की इस सरकार से पहले दशकों तक सरकार कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने चलाई थी, जिनकी समाजवादी सोच में पर्यटन में निवेश करने की कल्पना तक नहीं की जा सकती।
पर भाजपा इस सोच की पाबंदियों में नहीं बंधी है, इसलिए समझना मुश्किल है कि उनके मुख्यमंत्रियों ने उन सुविधाओं में निवेश क्यों नहीं किया, जिनसे विदेशी पर्यटक आकर्षित होते हैं। कुछ दोष केंद्र सरकार का भी है। मोदी शायद देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पर्यटन की अहमियत समझी है। पर उनके कार्यकाल में विदेशी पर्यटकों का भारत आना उतना ही कठिन रहा है, जितना कांग्रेस के समय था।
मुंबई में 26/11 वाले हमले के बाद चिदंबरम साहब ने बतौर गृह मंत्री विदेशियों का भारत आना इतना कठिन कर दिया था कि अगर कोई विदेशी पर्यटक अपनी भारत यात्रा के बीच नेपाल या श्रीलंका जाना चाहता है, तो उसका भारतीय वीजा रद्द हो जाता है।
फिर दूसरा वीजा लेना पड़ता है, जो आसानी से नहीं मिलता। समझ में नहीं आता कि मोदी के दौर में यहां परिवर्तन क्यों नहीं लाया गया। ऐसा होता, तो ग्रामीण भारत में लाखों रोजगार के अवसर पैदा हो गए होते और शायद किसानों में उतनी बेचैनी नहीं दिखती, जो आज दिख रही है।