सीमा पर जवान तो शहादत के लिए ही होते हैं- जी, यह राज हाल ही में बिहार के एक मंत्री महोदय ने तब खोला, जब सीमा पर पांच जवानों की शहादत पर देश गुस्से में उबल रहा था। शुक्र है कि उन्होंने यह नहीं कहा कि देश तो गुस्सा करने के लिए ही होता है। खैर जी, अभी तक यही माना जा रहा था कि सीमा पर जवान देश की रक्षा के लिए होते हैं। हालांकि वे प्राकृतिक आपदाओं में फंसे लोगों की भी रक्षा करते हैं, जैसे हाल ही में उत्तराखंड में की। नेता जब देश को दंगों में झोंक देते हैं, तब वे निर्दोष लोगों को दंगों से बचाने के लिए भी होते हैं। पर माना यही जाता है कि वे देश की रक्षा के लिए होते हैं। वैसे ही, जैसे किसान देश की भूख मिटाने के लिए होते हैं। हालांकि इधर किसान आत्महत्याएं ही ज्यादा कर रहे हैं। पर यह बात भी चुपके से कहने की ही है, क्योंकि कोई नेता यह भी कह सकता है कि किसान तो आत्महत्या करने के लिए ही होते हैं।
गनीमत यही रही कि इससे पहले बिहार में मिड डे मील खाकर मरनेवाले बच्चों के मामले में किसी मंत्री ने नहीं कहा कि गरीबों के बच्चे तो होते ही है मिड-डे मील खाकर मरने के लिए। या बंगाल का कोई मंत्री कह सकता था कि बच्चे तो होते ही हैं अस्पताल में मरने के लिए। पिछले दिनों देश में बलात्कार का हल्ला भी बहुत मचा था। पर गनीमत यह रही कि किसी नेता ने इस मामले में बेशर्मी का परिचय नहीं दिया। हालांकि इससे मिलती-जुलती बातें तो उन्होंने कही ही। वैसे उत्तर प्रदेश का कोई मंत्री यह भी कह सकता था कि सरकारी अफसर तो सस्पेंड होने के लिए ही होते हैं। माफिया टाइप कोई नेता यह भी कह सकता था कि अफसर तो हमारी उंगलियों पर नाचने के लिए ही होते हैं। जैसे अपराध की दुनिया से आया हुआ कोई नेता यह कह सकता है कि पुलिसवाले तो हमारी सेवा करने के लिए ही होते हैं। यह नेता लोगों की मेहरबानी है कि उन्होंने आज तक यह राज नहीं खोला कि नेता तो राज करने के लिए होते हैं। वे तो विनम्रता से यही कहते रहते हैं कि हम तो देश और जनता की सेवा करने के लिए हैं।
यह उनकी मेहरबानी है, वरना वे अपने चहेते माफिया सरदारों, ठेकेदारों आदि के बारे में कह सकते थे कि वे तो होते ही हैं जनता को लूटने के लिए। बल्कि वे तो यह भी कह सकते थे कि हम नेता तो हैं ही भ्रष्टाचार और घोटाले करने के लिए, जनता को बेवकूफ बनाने के लिए। वैसे यह जनता है और यह सब जानती है कि कौन किसलिए होता है।