अब एआई का उपयोग एक ‘डेथ कैलकुलेटर’ बनाने के लिए किया जा रहा है। यह इतना सक्षम होगा कि मृत्यु का दिन तक बताने की भविष्यवाणी कर सकेगा। तो दुनिया कितनी बदल जाएगी? गणनाएं, ज्योतिष क्या बीते दिनों की बात हो जाएंगे? न्यूयॉर्क व लंदन से मुख्य रूप से प्रकाशित होने वाली नेचर कंप्यूटेशनल साइंस जर्नल में प्रकाशित एक विवाद ने इस बात को चर्चित कर दिया, जिसमें मृत्यु की भविष्यवाणी करने के लिए एआई का उपयोग शामिल था। हालांकि, यह प्रारंभिक था और सत्यता के बहुत करीब भी नहीं रहा।
डेनमार्क में हजारों लोगों के आर्थिक व स्वास्थ्य डाटा, दोनों का उपयोग करते हुए, एक एआई आधारित तंत्र लगभग 78 प्रतिशत सटीकता के साथ भविष्यवाणी करने में सक्षम था कि अगले चार वर्षों के भीतर कौन-कौन मृत्यु को प्राप्त करेगा। मौत का समय बताने वाले प्रेडिक्टिव एआई मॉडल का नाम है, लाइफ-2 वीईसी (लाइफ इवेंट्स टू वेक्टर), जिसे अधिक डाटा के साथ तैयार किया गया।
इस मॉडल को पहले 60 लाख डैनिश लोगों के जन्म की तारीख, स्कूल, शिक्षा, सैलरी, हाउसिंग व स्वास्थ्य जैसे डाटा दिए गए। इस आधार पर एआई मॉडल ने अंदाजा लगाया कि इससे आगे क्या हो सकता है। बस, इसी आधार पर मौत का समय भी पता लग सकता है। इसे 35 से 65 साल के लोगों पर प्रयोग किया गया, जिसमें आधे लोग 2016 से 2020 के बीच मर चुके थे, तब इस मॉडल ने 78 फीसदी सटीक उत्तर देकर बता दिया कि कौन मरेगा और कौन जिएगा।
प्रेडिक्टिव एआई का आशय कंप्यूटर प्रोग्राम की उस क्षमता से है, जिससे सांख्यिकीय विश्लेषण का इस्तेमाल कर शरीर के पैटर्न व व्यवहार को पहचानकर अनुमान लगाया जाता है। इसमें डाटा, मशीन लर्निंग और पैटर्न शामिल हैं। गनीमत है, इस एआई टूल को सार्वजनिक मंजूरी नहीं है।