जब से सोने के दाम में गिरावट आई है, मेरे मोहल्ले के चेन स्नैचरों का दम ही निकल गया है। निठल्ले घूम रहे हैं वे आजकल। अखबार भी चेन-स्नैचिंग की खबरों के बिना सूने-सूने से लगते हैं। सोने के भाव गिरने से महिलाएं खुश हैं। लेकिन ऐसी खुशी का क्या मतलब, जो किसी की रोजी-रोटी छीन ले? चेन स्नैचिंग स्नैचरों के लिए रोजी-रोटी समान है। माना कि उनका धंधा गंदा है, पर धंधा तो है। कम से कम वे काम पर तो लगे हुए थे न। निठल्ले तो नहीं टहल रहे थे यहां-वहां। दिन भर में दो-चार चेनों पर हाथ साफ करने का मतलब था, अच्छी-खासी कमाई। इस बहाने उनकी जेब और गर्लफ्रेंड का खर्च निकल ही रहा था, क्या बुरा है।
चेन स्नैचिंग को मामूली काम न समझिए। इसमें बहुत बड़ा रिस्क है। चेन खींचकर भाग गए, तो ठीक। अगर कहीं पकड़े गए, तो मार-कुटाई के साथ-साथ जेल की यात्रा भी करनी पड़ सकती है। इस लाइन में केवल वही लोग आते हैं, जिनका दिल कठोर होता है। किसी की गर्दन पर हाथ साफ करना कोई छोटी बात नहीं है। सोना जितना प्रिय चेन पहनने वाले को है, उतना ही चेन-स्नैचर को भी है। फिर भला कौन छोड़ना चाहेगा!
लेकिन इधर सोने के भाव ने सब गड़बड़ कर दी है। जब सोने के भाव बढ़ रहे थे, तब मेरे मोहल्ले की महिलाएं जमकर सोना पहन रही थीं, मगर जब से भाव गिरे हैं, उन्होंने सोना पहनना इतना कम कर दिया है कि बेचारे चेन स्नैचरों के धंधे-पानी पर बन आई है। महिलाएं सोना पहन भले कम रही हों, मगर खरीद खूब रही हैं। पत्नियों को सोना खरीद दे रहे पतियों के बारे में सोचता हूं, तो मेरा कलेजा मुंह को आ जाता है।
'अच्छे दिन' कब 'बुरे दिन' हो जाएं, कोई नहीं जानता। कल तलक जो लौंडे चेन स्नैचिंग कर महंगी-महंगी गाड़ियों पर घुमा करते थे, वे आज साइकिल और बीड़ी पर उतर आए हैं। वक्त और नसीब को पलटते देर नहीं लगती। अब यही देखिए न कि चेन स्नैचर घर में बैठ गए हैं, जबकि मोहल्ले के पति लोग सोना खरीदते हुए पसीना-पसीना हो रहे हैं।