भारत में छोटा-मोटा इंडिया बसता है! यह इंडिया खुशहाल है। इसके बाशिंदे हर समय उत्साह, उमंग और धन से भरे होते हैं। इनके पास इतना धन है कि उसे ठिकाने लगाने के लिए समय-समय पर या हर दिन होने वाले इंटरनेशनल-डे भी कम पड़ते हैं। इस इंडिया में सबकी सोच एक जैसी है।
जहां भी कुछ होने लगता है, ये पहुंच जाते हैं, चाहे अन्ना का आंदोलन हो, माता का जगराता हो, शहर की किसी सड़क पर तमाशा करना हो या फिर योगा-डे मनाना ही क्यों न हो। जहां भी मीडिया है, वहां यह छोटा-मोटा इंडिया हाजिर है। कुछ नहीं होता, तो किट्टी पार्टी हो जाती है, एक रंग की ड्रेस में सभी इकट्ठा होकर खा-पी लेते हैं या किसी संगठन के कहने पर मैराथन में दौड़ लगा लेते हैं।
अरे, तुम योगा-डे पर नहीं दिखे...? किसी ने पूछ लिया।
किसने कहा? आधे अखबारों में तो हमारी ही फैमिली छाई हुई है। सभी ने नाइकी पहन रखी थी। खासतौर पर खरीदी थी। सुबह छह बजे पहुंच गए थे योग करने। जैसी मेट मोदी जी की थी, वैसी ही खरीदी थी सबके लिए मेड-इन-चाइना! फेसबुक और वाट्सऐप पर इतने कमेंट्स आए हैं कि पढ़ने की भी फुर्सत नहीं है अभी तो।
यह लिटिल इंडिया कुछ भी करने को तैयार रहता है। क्रिकेट मैच जीवन में भले कभी न देखा हो, पर भारत जीत जाए, तो पूरे शहर में झंडा लहराते, कार की छत पर नाचते, चीखते-चिल्लाते रात बिता देते हैं। गर्मी में जब भारत के पास पीने को पानी नहीं होता है, यह इंडिया टैंकर से पानी उड़वाकर रेन-डांस करता है।
भारत को टमाटर खाने को न मिले, तो चलेगा, इंडिया तो टोमैटो-होली खेलकर ही रहेगा! इंडिया को इससे फर्क नहीं पड़ता कि उनके शामिल होने से किसी को कुछ मिल रहा है या नहीं। उसे यही अच्छा लगता है कि वे वहां नजर आ गए। योगा-डे का ट्रेक-सूट, मेट और सारा सामान रख दिया है संभालकर! अगले साल फिर जरूरत पड़ेगी। रोज-रोज इस्तेमाल क्यों करना? योगा-डे के बगैर योग करने का क्या फायदा? मीडिया में नजर तो आएगा नहीं!