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जब गरमी में यूरोप बन गया भारत जैसा : गरमी से लड़ने का तरीका भी इन्हें मालूम नहीं है

क्षमा शर्मा Published by: क्षमा शर्मा Updated Sun, 14 Jul 2019 03:38 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कल्पना कीजिए कि आप भारत की गरमी से परेशान हो गए हैं। इससे बचने के लिए किसी पहाड़ी स्थान पर जाना चाहते हैं, लेकिन वहां भी बहुत गरमी है। लगता है कि इससे अच्छा तो किसी ठंडे देश में ही चले जाते। और फिर आप स्विट्जरलैंड या ऐसे ही किसी देश की तरफ उड़ लेते हैं। लेकिन जब यहां आते हैं, तो पाला पड़ता है अड़तीस और चालीस डिग्री सेल्सियस के तापमान से।

इसके अलावा पहाड़ी इलाकों की धूप भी बहुत तीखी होती है। पिछले कुछ दिनों से ऐसे नजारे मैंने हर जगह देखे हैं। फ्रांस में तो इतनी गरमी थी कि सांस फूलती थी। खबरों के अनुसार वहां लोग गरमी से बचने के लिए बीयर पीकर पानी में उतर जाते हैं और उनमें से बहुत से डूब जाते हैं। गरमी से लड़ने का तरीका भी इन्हें मालूम नहीं है। इसीलिए इन्हें लगता है कि अगर गरमी से बचना है, तो नंगे बदन रहा जाए। इस कारण डिहाइड्रेशन और तरह-तरह के रोगों के शिकार भी होते हैं।


पिछले ग्यारह सालों से यह लेखिका यहां आती रही है। 2008 में जब पहली बार आई थी, तो दोपहर में बाहर निकलने पर स्वेटर पहनना पड़ता था। शॉल ओढ़नी पड़ती थी। फिर भी ठंडक महसूस होती थी। 2010 में जब पहली बार फ्रांस गई थी, तो रात और दिन के वक्त वहां कुछ गरमी महसूस हुई थी। तब भरे-पूरे सूरज वाले दिन को किसी बोनस की तरह देखा जाता था और लोग बड़ी संख्या में धूप खाने निकल पड़ते थे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कल्पना कीजिए कि आप भारत की गरमी से परेशान हो गए हैं। इससे बचने के लिए किसी पहाड़ी स्थान पर जाना चाहते हैं, लेकिन वहां भी बहुत गरमी है। लगता है कि इससे अच्छा तो किसी ठंडे देश में ही चले जाते। और फिर आप स्विट्जरलैंड या ऐसे ही किसी देश की तरफ उड़ लेते हैं। लेकिन जब यहां आते हैं, तो पाला पड़ता है अड़तीस और चालीस डिग्री सेल्सियस के तापमान से।

इसके अलावा पहाड़ी इलाकों की धूप भी बहुत तीखी होती है। पिछले कुछ दिनों से ऐसे नजारे मैंने हर जगह देखे हैं। फ्रांस में तो इतनी गरमी थी कि सांस फूलती थी। खबरों के अनुसार वहां लोग गरमी से बचने के लिए बीयर पीकर पानी में उतर जाते हैं और उनमें से बहुत से डूब जाते हैं। गरमी से लड़ने का तरीका भी इन्हें मालूम नहीं है। इसीलिए इन्हें लगता है कि अगर गरमी से बचना है, तो नंगे बदन रहा जाए। इस कारण डिहाइड्रेशन और तरह-तरह के रोगों के शिकार भी होते हैं।

पिछले ग्यारह सालों से यह लेखिका यहां आती रही है। 2008 में जब पहली बार आई थी, तो दोपहर में बाहर निकलने पर स्वेटर पहनना पड़ता था। शॉल ओढ़नी पड़ती थी। फिर भी ठंडक महसूस होती थी। 2010 में जब पहली बार फ्रांस गई थी, तो रात और दिन के वक्त वहां कुछ गरमी महसूस हुई थी। तब भरे-पूरे सूरज वाले दिन को किसी बोनस की तरह देखा जाता था और लोग बड़ी संख्या में धूप खाने निकल पड़ते थे। 

इन देशों में कुछ साल पहले तक कोई पंखे या एयर कंडीशनर के बारे में नहीं जानता था। अब घर-घर में ये उपकरण मिल सकते हैं। इसके अलावा एक मुश्किल यह भी है कि अधिकांश घरों में चारों तरफ शीशे लगे हैं। इनके कारण गरमी और अधिक लगती है, क्योंकि घरों का निर्माण ठंड से बचने के लिए किया जाता है, इसलिए ऐसी तकनीक इस्तेमाल की जाती रही है जिससे कि घर अधिक से अधिक गरम रहें। 

लेकिन अब जब तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है, तो लोगों में त्राहि-त्राहि मची है। फ्रांस में रिकॉर्ड तापमान 45.9 और स्विटजरलैंड में बहुत से स्थानों पर चालीस डिग्री सेल्सियस तक रहा है। पेरिस में तो पुरानी कारों के चलने पर रोक लगा दी गई थी। नब्बे संस्थानों में से पचीस में पानी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई। स्कूलों को बंद कर दिया गया था।

समझ में नहीं आ रहा कि गरमी की मुसीबत से कैसे निपटें। ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन की बातें अरसे से की जाती रही हैं। मगर व्यापारिक हितों के सामने इन बातों पर ध्यान ही नहीं दिया गया। जबकि इन देशों में न हरियाली की कमी है, न पानी की। 

जबकि अपने यहां के बारे में तो कहा जा रहा है कि अगर ऐसा ही रहा, तो अगले तीस साल में हिमालय के अधिकांश ग्लेशियर पिघल जाएंगे। कभी सोचा है कि तब क्या होगा? गंगा- यमुना और हिमालय से निकलने वाली तमाम नदियों का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। पहले ही हमारे यहां पानी की बेहद कमी है और जंगल लगातार कटते जा रहे हैं।

यूरोप के देश शायद जलवायु परिवर्तन से आने वाली आफतों का हल आसानी से ढूढ़ लेंगे, क्योंकि यहां की आबादी बहुत कम है। मगर हम क्या करेंगे। जहां आबादी इस गति से बढ़ रही है कि जल्दी ही चीन को पीछे छोड़ देंगे। अधिक आबादी माने अधिक संसाधनों की जरूरत। पानी इनमें सबसे बड़ी जरूरत है। जिस पानी के लिए हमारे यहां मारा-मारी मची है, आगे आने वाले दिनों में इतनी विशालकाय आबादी की जरूरत आखिर कैसे पूरी होगी। 

पानी कम खर्च कैसे करें, इसके उपाय सुझाए जा रहे हैं, पानी को महंगा करने की बातें की जा रही हैं। ऐसे उपायों की सबसे बड़ी चुनौती वे ही लोग होंगे जो साधनहीन हैं, क्योंकि पानी महंगा हो जाए तो अमीर, उच्च मध्य वर्ग और मध्य वर्ग तो अपना काम चला लेंगे, मगर गरीबों का क्या होगा। 

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सालों में ऐसी ही गरमी पड़ेगी। सोचें कि भारत में तो गरमी और लू से निपटने के लिए तरह-तरह के तरीके मौजूद हैं। जिन्हें बचपन से ही सिखाया जाता है। पानी पीकर निकलो, पसीने से नहाकर बाहर से आए हो, तो पंखे में मत खड़े हो। 

मगर इन देशों में इन बातों के बारे में लोगों को कुछ नहीं मालूम। ऐसा लगता है कि आने वाले सालों में ठंडे और गरम देशों का फर्क मिट जाएगा। अब जब बारिश होने लगी है, तो भारत की तरह ही यहां लोगों ने चैन की सांस ली है।
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