कल्पना कीजिए कि आप भारत की गरमी से परेशान हो गए हैं। इससे बचने के लिए किसी पहाड़ी स्थान पर जाना चाहते हैं, लेकिन वहां भी बहुत गरमी है। लगता है कि इससे अच्छा तो किसी ठंडे देश में ही चले जाते। और फिर आप स्विट्जरलैंड या ऐसे ही किसी देश की तरफ उड़ लेते हैं। लेकिन जब यहां आते हैं, तो पाला पड़ता है अड़तीस और चालीस डिग्री सेल्सियस के तापमान से।
इसके अलावा पहाड़ी इलाकों की धूप भी बहुत तीखी होती है। पिछले कुछ दिनों से ऐसे नजारे मैंने हर जगह देखे हैं। फ्रांस में तो इतनी गरमी थी कि सांस फूलती थी। खबरों के अनुसार वहां लोग गरमी से बचने के लिए बीयर पीकर पानी में उतर जाते हैं और उनमें से बहुत से डूब जाते हैं। गरमी से लड़ने का तरीका भी इन्हें मालूम नहीं है। इसीलिए इन्हें लगता है कि अगर गरमी से बचना है, तो नंगे बदन रहा जाए। इस कारण डिहाइड्रेशन और तरह-तरह के रोगों के शिकार भी होते हैं।
पिछले ग्यारह सालों से यह लेखिका यहां आती रही है। 2008 में जब पहली बार आई थी, तो दोपहर में बाहर निकलने पर स्वेटर पहनना पड़ता था। शॉल ओढ़नी पड़ती थी। फिर भी ठंडक महसूस होती थी। 2010 में जब पहली बार फ्रांस गई थी, तो रात और दिन के वक्त वहां कुछ गरमी महसूस हुई थी। तब भरे-पूरे सूरज वाले दिन को किसी बोनस की तरह देखा जाता था और लोग बड़ी संख्या में धूप खाने निकल पड़ते थे।