कल पेट्रोल पंप पर पहुंचा, तो देखा, मेहरा जी डीलर से झगड़ रहे हैं, अच्छी लूट मचा रखी है तुमने। कल उन्यासी छब्बीस था, आज उन्यासी छिहत्तर कैसे हो गया?
डीलर कह रहा है, पेट्रोल के रेट हमारे हाथ में नहीं हैं। कंपनी जो बताती है, उसी पर बेचना है।
लेकिन आज अचानक रेट पचास पैसे बढ़ कैसे गए?
सर, पचास पैसे का सिक्का मिलता कहां है? ऐसे में लीटर में पचास पैसे बढ़ भी गए, तो क्या फर्क पड़ता है!
मेहरा जी बोले, बात पचास पैसे की नहीं, लूट की है। एक तो तुम्हारा मीटर हर लीटर में पचास ग्राम पेट्रोल पी लेता है, बाकी बीस-पच्चीस ग्राम मिलावट के नाम जाता है। सौ-दो सौ ग्राम पेट्रोल तो जाम को समर्पित है। मुझे तो एक लीटर में सात सौ ग्राम पेट्रोल ही मिलता है। आज तो मुझसे कल वाला ही रेट ले लो।
वह बोला, आपसे कम लूंगा, तो पीछे पचास लोग खड़े हैं। कंपनी वालों को पता चलेगा, तो लाइसेंस कैंसिल हो जाएगा। आगे आपकी मर्जी, पेट्रोल लो, न लो।
मेहरा जी बोले, पेट्रोल तो मैं ले चुका हूं।
तो कुछ नहीं हो सकता। पेमेंट तो नए रेट पर ही करनी पड़ेगी।
मेहरा जी बोले, तुम टंकी से एक रुपये का पेट्रोल निकाल लो।
सुबह-सुबह स्कूटर की टंकी से पेट्रोल कैसे निकलेगा? एक रुपये का पेट्रोल मैं नापूंगा कैसे? निकाल भी लिया, तो उसे रखूंगा कहां?
यार, नाराज क्यों होते हो। मैं तो कल के रेट से घर के सारे छुट्टे इकट्ठा कर दो लीटर पेट्रोल लेने आया था। लेने के बाद देखा, तो एक रुपया कम पड़ गया। तब पता लगा कि रेट बढ़ा है। पेट्रोल तुम निकाल नहीं सकते, रेट कम करोगे नहीं और एक रुपया मेरे पास है नहीं। मैं क्या करूं?
पेट्रोल पंप वाला बोला, एक रुपये फिर कभी दे दीजिएगा।
मेहरा जी बोले, हमारी भी कोई इज्जत है। ऐसा नहीं होगा।
मुझसे रहा नहीं गया। मुस्कराते हुए मैंने कहा, मेहरा जी, आप यह सोच लो कि एक सौ अट्ठावन की खरीद पर एक रुपये का पेट्रोल मुफ्त मिला आपको, सब्जी की खरीद में मिर्च की तरह।
मेहरा जी स्कूटर स्टार्ट करते हुए बोले, थैंक्यू दोस्त, पर लगता है कि पेट्रोल का विकल्प ढूंढना पड़ेगा।
मैं कहना चाहता था कि मेहरा जी, अनाज, चीनी, सब्जी-आप किस-किसका विकल्प ढूंढोगे?