यह घटना केवल सन्न करने वाली ही नहीं है, हम सबके मुंह पर एक करारा तमाचा है। कानून के राज के नाम पर कलंक है। महिला सुरक्षा के नाम पर बड़ी-बड़ी बात करने वाली सरकारों और पुलिस प्रशासन के लिए डूब मरने का मामला है। उत्तर प्रदेश का सिंगावली क्षेत्र राजधानी दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है। 2009 से अप्रैल 2019 तक एक लड़की दो बार मात्र 10-10 हजार रुपये में बिकी और लगातार बलात्कार का शिकार होती रही, किंतु कोई उसे बचाने वाला नहीं मिला। उसने पुलिस के यहां भी गुहार लगाई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। पुलिस में 10 वर्षों तक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई।
वहां पहले मायावती की अगुआई वाली बसपा सरकार थी, फिर अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा की सरकार थी। पिछले दो वर्षों से वहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। हम किसे दोषी कहें? अगर उस लड़की ने बलात्कारियों से तंग आकर खुद को आग के हवाले नहीं किया होता तथा उसका वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं आता, तो उसके साथ हुई यौन क्रूरताओं की सचाई सामने नहीं आती। यह है, हमारे देश में महिला सुरक्षा की स्थिति। आज वह 75-80 प्रतिशत जली हालत में दिल्ली के एक अस्पताल में जीवन और मौत से जूझ रही है। वह दर्द से कराहते हुए कह रही है, 'काश मैं मर जाती। कोई भी इस तरह के जख्मों को नहीं झेलना चाहता। लेकिन, अब जबकि मैं जल चुकी हूं, तो लोग कम से कम मेरा रेप तो नहीं करेंगे।'आखिर किस मानसिक स्थिति में ऐसा वक्तव्य निकल रहा होगा?
इसके कई पहलू हैं। इसका एक पहलू हमारी सामाजिक संरचना से भी जुड़ा है। 2009 में उसके पिता और चाची ने केवल 14 साल की उम्र में 10 हजार रुपये लेकर एक उम्रदराज व्यक्ति से उसकी शादी कर दी। एक साल में ही रिश्ता टूट गया। इसके बाद पिता और चाची ने एक युवक से 10 हजार रुपये लेकर उसका दोबारा विवाह करा दिया। उसका दूसरा पति उसके पिता का ही दोस्त था। उसके पति ने एक गांव निवासी बाबू पुत्र राजवीर से कुछ रुपये उधार लिए थे। रकम नहीं चुकाने पर बाबू ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। मामले की जानकारी देने पर भी पति खामोश रहा। उसके बाद उसके साथ दुष्कर्म का सिलसिला आरंभ हो गया।
जरा सोचिए, जब 14 वर्ष की उम्र में 10 हजार रुपये लेकर उम्रदराज व्यक्ति से उसकी शादी की जा रही थी, तो समाज के किसी व्यक्ति ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? जबकि पूरे गांव को मालूम था कि क्या हो रहा है। उसे एक युवक भी मिल गया, जिसने उसकी कथा जानकर उसका साथ देने की कोशिश की। उसने मुरादाबाद में एक किराये के कमरे में उसे रख दिया। किंतु यहां भी बलात्कारी आ धमके। उसने फिर पुलिस से शिकायत की लेकिन कोई असर नहीं। उल्टे पुलिस शिकायत से गुस्साए कुछ बलात्कारी 28 अप्रैल, 2019 को उसके घर पहुंचे और तेजाब डालने व जान से मारने की धमकी दी। उस समय वह घर पर अकेली थी। उसने हारकर स्वयं को ही आग लगा लिया। कानून के राज में दुष्कर्मी और अपराधी ऐसा दुस्साहस कैसे कर सकते हैं? क्या उनको कानून का कोई भय नहीं? अब जबकि मामला मीडिया में आ गया है, पुलिस सक्रिय हुई है। पूरा मामला एक व्यापक जांच की मांग करती है। दिल दहलाने ओर क्षोभ पैदा करने वाले इस मामले में सबसे बड़ी बात है समाज की चेतना। एक चैतन्यशील और नैतिक समाज कभी भी इस तरह एक लड़की की बिक्री और उसके साथ यौनाचार को होने नहीं दे सकता। ऐसा चैतन्यशील समाज कैसे बने, इसके लिए हम सबको प्रयास करना होगा।