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बता तेरी रजा क्या है

Tue, 24 Mar 2015 08:18 PM IST
अशोक सण्ड
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ईस्ट इंडिया कंपनी के अस्त और मल्टी नेशनल कंपनियों के उदित होने के बावजूद कुछेक मसलों में ताजातरीन अतुल्य भारत आज तक नहीं बदला। यहां भाषा बदली, भूषा बदली, और तो और भोजन तक बदल गया, मगर नहीं बदला है, तो सरकारी महकमे में काम करने वालों के ‘चरित्र’ का सालाना आकलन। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर गए साल की खुद की ‘करनी’ (अंग्रेजी में सेल्फ अप्राइजल) पर ‘सी-आर’ लिखवाना ही पड़ता है। सी-आर यानी कैरेक्टर रोल। व्यापक संदर्भ में चरित्र को चाल-चलन और नैतिकता से भले ही जोड़ा जाए, सरकारी बाबुओं की चरित्र पंजिका में उनकी कार्यक्षमता की गति, प्रगति, सदगति और अधोगति की समीक्षा होती है। दुर्गति को नहीं प्राप्त होते वह, जो साहब को देखते ही ‘शोभित कर नवनीत लिए’ की मुद्रा में रहते हैं।
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चरित्र का ही अंग्रेजी रूप है, कैरेक्टर। एक सुभाषित है इस बावत- ह्वेन वेल्थ इज लॉस्ट, नथिंग इज लॉस्ट। इफ हेल्थ इज लॉस्ट, समथिंग इज लॉस्ट। बट ह्वेन ‘कैरेक्टर’ इज लॉस्ट, एव्रीथिंग इज लॉस्ट। लिप्यांतर हुआ संपत्ति खो जाने से कुछ भी नहीं होता, मगर सेहत ‘खो’ जाए, तो लगता है कि पल्ले से कुछ गया। और यदि चरित्र ‘खो’ जाए, तो सब कुछ स्वाहा। इस नसीहत से हमारे बाल-सखा इत्तफाक नहीं रखते। उनकी ठोस धारणा है कि जिंदगी में ‘कुछ’ पाने के लिए कुछ न कुछ तो ‘खोना’ ही पड़ता है। स्वतंत्र भारत में जिस किसी ने कुछ पाया ‘चरित्र’ खोकर ही पाया।

बहरहाल, मौसम सी-आर लिखवाने का है। इस ‘कैरेक्टर’ के शेड के अंदर हर बंदा ‘विनय-पत्रिका’ नजर आएगा। वह कुछ खोना नहीं चाहता। सब कुछ पाने की चाहत है। इसलिए धेला भर भी काम न करने वाले कर्मों के पहाड़ का शब्द-चित्रांकन करेंगे। टारगेट और अचीवमेंट होगा शत प्रतिशत। 'सी-आर’ में अच्छी एंट्री के लिए ‘शेर’ की टिप्स एक ‘एक्स’ सरकारी बाबू द्वारा अर्ज है- खुशामद कर बुलंद इतनी की हर ‘सी आर’ के पहले/ ‘साब’ बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...
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