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उत्तर प्रदेश में क्या बदला?

सुभाषिनी सहगल अली Updated Thu, 12 Oct 2017 05:01 PM IST
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सुभाषिनी सहगल अली
योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब अनेक लोगों ने इसका स्वागत किया।  इसलिए कि वह एक महंत हैं और वह जनता के हित में काम करेंगे। भ्रष्टाचार, लूट, दुर्व्यवस्था, औरतों के साथ बदसुलूकी, किसानों की समस्याएं, बिजली कटौती-इन सबके सुधार के लिए वह जरूर कुछ न कुछ करेंगे। किसी नई सरकार से यह उम्मीद करना अन्यायपूर्ण होगा कि वह कुछ दिनों में ही कई दशकों की समस्याओं का समाधान कर देगी। पर नई सरकार को उनके आश्वासनों की याद दिलाना जरूरी है।  योगी जी ने आते ही ‘रोमियो स्क्वॉड’ का गठन कर लड़कियों और महिलाओं को छेड़छाड़ और बदसुलूकी से बचाने का वायदा किया।  उन्होंने देश के शहरों को 24 घंटों की, कस्बों को 20 घंटे की और गांवों को 18 घंटे की बिजली आपूर्ति का आश्वासन दिया। उन्होंने प्रदेश भर में सस्ती जेनेरिक दवाओं की 6,000 दुकानें खोलने का वायदा किया।  किसानों की ऋण माफी की बात तो उन्होंने अपनी पहली प्रेस वार्ता में ही दोहराई।


उनकी सरकार बने छह महीने हो गए हैं। पर किसी भी एक आश्वासन को पूरा करने का काम नहीं हुआ है। सस्ती दवाओं का मतलब सिर्फ यही नहीं कि गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों का स्वास्थ्य लाभ होगा, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के इलाज का ध्यान भी रखा जा सकेगा। किसानों की बदहाली का सर्वाधिक दुष्प्रभाव ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और बच्चियों पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्ष किसानों के लिए संकट के वर्ष साबित हुए है। नतीजतन हजारों ग्रामीण लड़कियों की पढ़ाई छूट गई है।


लड़कियों और महिलाओं पर होने वाली हिंसा की घटनाओं की संख्या ही नहीं बढ़ी है, उनके साथ होने वाली बर्बरता भी चरम पर है। बिजली का बुरा हाल है। बड़े शहरों में घंटों बिजली गायब रहती है। ऐसे में कस्बों और गांवों की स्थिति की कल्पना ही की जा सकती है। जेनेरिक दवा की दुकानों का अभी तक अता-पता नहीं है। किसानों की ऋण माफी की कहानी तो बहुत ही दुखदायी है। जितना पैसा उनको दिए जाने वाले चेक छापने में लगाया गया था, उससे कम की राशि उसके नामे के आगे लिखी गई है।


योगी सरकार वायदा खिलाफी करने वाली पहली सरकार नहीं है। पर प्रदेश में होने वाली अप्रिय घटनाओं के प्रति उनका रवैया चिंता की बात है। गोरखपुर में सरकारी अस्पतालों में शिशुओं की मौत के बाद उन्होंने कई डॉक्टरों और ऑक्सीजन की आपूर्ति  करने वाली कंपनी के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की और घोषणा की कि इस साल जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी। बच्चों की मौत के माहौल में कृष्ण के जन्म को धूमधाम से मनाना संवेदनशीलता का कैसा सुबूत है, शायद इस बारे में उन्होंने नहीं सोचा होगा। बीएचयू में छेड़छाड़ के खिलाफ वहां की छात्राओं ने जबर्दस्त आंदोलन किया और  उन्हें पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ीं। तब योगी जी भी वाराणसी में थे। उन्होंने बस इतना कहा कि यह सब बाहर के लोगों का राजनीतिक षड्यंत्र है।  छात्रों की पीड़ा की उन्होंने अनदेखी की।


इसके तुरंत बाद उन्होंने अयोध्या में श्रीराम की 100 मीटर ऊंची मूर्ति बनाने और दिवाली के दिन एक लाख से अधिक दीये जलाकर सरयू में प्रवाहित करने की घोषणा की। फिर उन्होंने कानपुर की रोडवेज कार्यशाला में भगवा रंग में रंगी 50 पुरानी बसों को झंडी दिखाने का काम किया। पता नहीं क्यों, उनकी घोषणाओं और कामों का प्रदेश की महिलाओं की परेशानियों से किसी प्रकार का संबंध दिखाई नहीं दे रहा।


-माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य
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